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उज्जैन. महाकाल मंदिर परिसर स्थित पुननिर्मित सभा मंडप के आंतरिक हिस्से में सागवान की लकड़ी के पाटों पर प्राचीन संस्कृति और परंपरा को उकेरा जाएगा। इसके लिए नक्काशकारों से कार्य के प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं। नक्काशीदारी में करीब 35 घनमीटर सागवान की लकड़ी का उपयोग होगा। लकड़ी वन विभाग से क्रय की जाएगी। कारीगर का चयन करने के लिए करीब 15 दिन बाद निविदा जारी होने की उम्मीद है।
आंतरिक हिस्से को संवारेंगे
महाकाल मंदिर में कोटितीर्थ के पास पुराने सभामंडप को तोड़कर 1 करोड़ 88 लाख रुपए की लागत से पुनर्निर्मित किया गया है। सभामंडप के आंतरिक हिस्से को नक्काशीदार लकड़ी से संवारा जाएगा। इसमें सागवान की लकड़ी के पाट पर प्राचीन, धार्मिक संस्कृति और परंपरा की झलक नजर आएगी। इस माह के अंत तक कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
लकड़ी से होगी साज-सज्जा
सभामंडप में अंदर के हिस्से की साज-सज्जा नक्काशीदार लकड़ी से होगी। इसके बाद भीतर का पूरा भाग लकड़ी से निर्मित नजर आएगा। इसके लिए वुडन क्लोडिंग और सिलिंग का कार्य होगा। पिलरों के आस-पास भी आकर्षक लकड़ी की क्लोडिंग की जाएगी। पूरे सभामंडप को लकडि़यों से कवर किया जाएगा। नक्काशीदार के लिए यूडीए द्वारा वन विभाग से लकडि़या क्रय किए जाने की योजना है। वुडन क्लोडिंग और सिलिंग का कार्य करने वाले कारीगर के लिए आचार संहिता खत्म होने के बाद प्रस्ताव आमंत्रित किए जा रहे हैं।
सागवान की लकड़ी का होगा उपयोग
सभामंडप में वुडन क्लोडिंग और सिलिंग कार्य में करीब 35 घनमीटर लकड़ी की आवश्यकता होगी। सागवान लकड़ी के लिए महाकाल मंदिर प्रबंध समिति, यूडीए द्वारा वन विभाग से तालमेल कर विभाग के डिपो से नीलाम होने वाली सागवान की लकड़ी क्रय करेंगे। गौरतलब है कि सभामंडप में वुडन वर्क के लिए मंदिर के पुजारी प्रदीप गुरु की प्रेरणा से बाबा महाकाल के एक भक्त भगवानसिंह आंजना ने 51 लाख रु. की राशि भेंट की हैं। महाकालेश्वर मंदिर में कोटितीर्थ के पास सभामंडप का कार्य पूर्ण हो गया है।
सभामंडप की पहली मंजिल तैयार
श्रद्धालुओं को नंदीहॉल बैरिकेड्स में प्रवेश देने के इसका उपयोग किया जा रहा है। इसमें महाकाल के जलाभिषेक के लिए जलपात्र भी लगा दिए गए है। पहली मंजिल बनकर तैयार नवनिर्माण के बाद सभामंडप की पहली मंजिल लगभग बनकर तैयार हो चुकी है। सभामंडप के पुराने भवन को तोडऩे के बाद पहले इसका मजबूत बेस तैयार किया। इसके सभामंडप में लोहे के कुल 27 पिलर लगाकर स्ट्रक्चर भी लोहे से कर इसमें लोहे का जाल बनाकर ऊपर सीमेंट-कांक्रीट किया गया है। मारबल की फ्लोरिंग की गई है।
पूर्व में दो बार हो चुका है जीर्णोद्धार
सभामंड़प का इसके पूर्व में दो बार जीर्णोद्धार जानकारों के अनुसार 400 वर्ष पहले ग्वालियर स्टेट की महारानी बायजाबाई द्वारा सागौन की लकड़ी से सभामंडप का जीर्णोद्धार कराया गया था। ग्वालियर स्टेट के सूबेदार रामचंद्र बाबा ने करीब 120 वर्ष पहले सभामंड़प का पक्का निर्माण कराया। इसके बाद अब फिर से जीर्णोद्धार हुआ है।
Published on:
02 Dec 2018 07:00 am
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