भगवान गणेशजी के पुत्र शुभ और लाभ दोनों रक्षाबंधन वाले दिन पिता से जिद कर बैठे कि उन्हें भी राखी बंधवानी है, लेकिन किससे बंधवाएं, हमारी तो कोई बहन नहीं है। दोनों पुत्रों की विनती सुनकर गौरी पुत्र गणेश ने कहा कि तुम शोक मत करो, मैं अभी तुम्हें बहन प्रदान करता हूं, तब गणेशजी ने त्रिशूल से मां संतोषी को प्रकट कर शुभ-लाभ के लिए रक्षाबंधन के दिन उनसे दोनों पुत्रों को राखी बांधने का कहा। इस प्रकार माता संतोषी शुभ और लाभ की बहन हुई। इन्हीं भाई-बहन का ये मंदिर उज्जैन में तैयार किया गया है।