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उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय में किताब खरीदी प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई। विवि प्रशासन ने दिल्ली की मेट्रो बुक्स प्रा. लिमिटेड को 23 जून को 70 लाख रुपए की किताब सप्लाय करने का आदेश दिया। इस आदेश के अनुसार 45 दिन में मांगी गई किताब सप्लाय करनी थी, लेकिन कंपनी ने उक्त अवधि में किताब सप्लाय नहीं की। इसी के साथ कंपनी ने विवि प्रशासन को एक पत्र भेजा है। इसमें लिखा है कि मांगी गई किताब नहीं मिल रही है। इसलिए अन्य किताबों की सूची भेजी जाए। हालांकि विवि प्रशासन नई सूची के लिए तैयार भी हो गया, लेकिन शिक्षक पीछे हट गए।
सात माह का अनुबंध, दो करोड़ की खरीदी
विक्रम विवि ने मेट्रो बुक्स लिमिटेड से किताब खरीदी प्रक्रिया की है। विवि और कंपनी के बीच पूर्व में 4 नवंबर 2011 को अनुबंध हुआ। इसकी अवधि 30 जून 2012 खत्म होनी थी। मात्र सात माह की अवधि के लिए यह अनुबंध हुआ। इसी अवधि में 1 करोड़ 89 लाख, 10 हजार रुपए की खरीदी की गई। यह आदेश और सप्लाय एकमुश्त हुई। इसके बाद वर्ष 2013 में इंडिका पब्ल्सिशर्स एवं डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड (सप्लायर) नई दिल्ली से दो वर्ष का अनुबंध हुआ। इसी अनुबंध की वृद्धि और खरीदी की शिकायत की जांच हाइकोर्ट के आदेश पर हो रही है।
पुस्तकालय के 8 कर्मचारियों को नोटिस
नई किताब खरीदी प्रक्रिया के विवादों के आने के बीच अब कुलपति प्रो. शीलसिंधु पाण्डे का पूरा ध्यान पुस्तकालय पर पहुंच गया है। उन्होंने एक माह में दो बार पुस्तकालय का निरीक्षण किया। इस दौरान आठ कर्मचारियों को विभिन्न कारणों से नोटिस जारी किया।
बिना देय पत्रक के रख गया बंडल
बुक सप्लायर विवि पुस्तकालय में एक बड़ा बंडल पुस्तकों का रख गया है। अनुमान यह है कि यह किताब करीब 20 लाख रुपए की है। हालांकि कंपनी इन पुस्तकों का देयपत्रक नहीं दे गई। इसलिए यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि पुस्तक कितनी और कौन सी है।
दो दिन में 50 लाख से ज्यादा की सप्लाय
विक्रम विवि प्रशासन को कंपनी ने किताब सप्लाय करने में कभी भी देरी नहीं की। कुलपति प्रो. शीलसिंधु पाण्डे के कार्यकाल में वर्ष 2015 में किताब खरीदी हुई। यह किताब खरीदी का आदेश 25 जून 2015 को कुलसचिव कार्यालय से जारी हुआ। 28 जून को किताब विवि पहुंची और स्टॉक में दर्ज तक हो गई। यह आदेश 55 लाख का था। इसी तरह 25 अप्रैल 2016 को किताब खरीदी आदेश दिया गया। यह किताबें 14 मई 2015 को विवि पहुंच गई।
किताब खरीदी के लिए आदेश जारी हुआ था। कंपनी को 45 दिन का समय दिया था, जो पूरा हो गया। नियमानुसार ऑर्डर निरस्त होगा। यह कार्रवाई विवि प्रशासन को करना है।
आर.के अहिरवार, प्रभारी पुस्तकालय।
किताब खरीदी प्रक्रिया में खुलेआम नियमों का उल्लंघन हुआ है। दो साल में एक भी शिकायत का निराकरण नहीं हुआ है। मेरी एक ही मांग है कि शिकायत का निराकरण कर दिया जाए। जो भी होगा सामने आ जाएगा। नया क्रय आदेश निरस्ती होना ही धांधली का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भरत शर्मा, याचिकाकर्ता किताब खरीदी शिकायत।
Published on:
19 Aug 2018 07:04 pm
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