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उज्जैन में आनंद भयो, जय महाकाल की…दूसरी सवारी में उमड़ी आस्था

सवारी के दौरान पूरे समय रिमझिम बारिश होती रही। श्रद्धालु छतरी लेकर बाबा की एक झलक पाने के लिए घंटों तक इंतजार करते रहे। जैसे ही पालकी उनके करीब आई, उनकी सारी थकान दूर हो गई और वे सबकुछ भूलकर जय महाकाल का उद्घोष करने लगे।

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उज्जैन. श्रावण के दूसरे सोमवार को राजाधिराज महाकाल चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में पालकी पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले तो हजारों श्रद्धालु आनंदित हो गए। सावन की रिमझिम फुहारों के साथ आस्था, भक्ति की बयार के बीच माहौल आनंद भयो, जय महाकाल की के जयघोष से गुंजायमान हो गया। दोपहर से रुक-रुक कर हो रही बरसात से इस बात के संकेत तो हो गए थे कि इंद्र देवता महाकाल का अभिषेक अवश्य करेंगे। एेसा हुआ भी, मंदिर से पालकी रवाना हुई और इसके कुछ देर बाद भी बादल बरस पड़े। बरसात का क्रम पूरी सवारी के दौरान बना रहा। कभी तेज तो कभी रिमझिम वर्षा ने भक्तों के उत्साह को चरम पर पहुंचा दिया।

इसके पहले दोपहर 3.30 बजे मंदिर के सभामंडप में पं. घनश्याम पुजारी ने पूजन-अर्चन करवाया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पूजन के बाद सवारी को आगे बढाकर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। मुख्य द्वार पर सशस्त्र बलों ने महाकाल को सलामी दी। आमतौर पर तीसरी-चौथी सवारी में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होती है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ कि दूसरी सवारी में ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। सवारी के साथ हजारों भक्त शिवमय होकर भगवान महाकाल की आराधना, झांझ मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते चल रहे थे। सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर शिप्रा के जल से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। पूजन के बाद भगवान सवारी रामघाट से रामानुज कोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर पंहुची। यहां परंपरानुसार गोपाल मंदिर के पुजारी ने पूजन किया गया। सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होती हुई पुन: महाकाल मंदिर पहुंची।

महाकाल से कोट मोहल्ला तक गायब हो गया पुलिस बैंड
महाकाल की दूसरी सवारी में भक्त उस समय आश्चर्यचकित रह गए, जब उन्हें सवारी में हर बार महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद आगे-आगे चलने वाला पुलिस बैंड, अश्वारोही दल तथा होमगार्ड की परेड करने वाली टुकड़ी कहीं नजर नहीं आई। हालांकि इस संबंध में पालकी के साथ चलने वाले पुजारियों से पूछा गया तो उन्होंने कहा इस बार दो बैंड दल चल रहे थे, जो एक महाकाल से था और दूसरा रामघाट से साथ चला।

सुरक्षाकर्मियों ने नेताओं को लगाए धक्के
पालकी के आगे चल रहे नेताओं के झुंड को सुरक्षाकर्मियों व सेवा में लगे युवकों ने धक्का लगाते हुए आगे बढ़ाया।

रामघाट में बिजली पोल पर उतरा करंट
पालकी जब रामघाट पहुंची, तो प्याऊ के समीप लगे बिजली पोल से एक व्यक्ति का हाथ टकराया, तो उसे झटका लगा। यह बात वहां खड़े पुलिस जवानों को बताई, तो उन्होंने बिजली कंपनी के लोगों को बुलाकर तुरंत उसे ठीक करा दिया।

युवाओं ने लांघे बैरिकेड्स
सवारी मार्ग पर लगे बैरिकेड्स को कुछ युवाओं को लांघते हुए देखा गया। हालांकि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से रोका, लेकिन तब तक तो वे अंदर कूद चुके थे। यह नजारे आमतौर पर सवारी में देखे गए।