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उज्जैन. माधव महाविद्यालय में दो माह बाद भी कुर्सी की जंग खत्म होती नजर नहीं आ रही है। महाविद्यालय में दो प्राचार्य की स्थिति बनी हुई। एक तरफ पूर्व प्राचार्य प्रो. बीएस मक्कड़ हैं। उच्च शिक्षा विभाग के दस्तावेजों में प्राचार्य और इन्हीं के पास वित्तीय अधिकार भी हैं। दूसरी तरफ प्राचार्य हेमंत नामदेव हैं। इन्हें पूर्व प्राचार्य प्रो. बीएस मक्कड़ ने प्रभार दिया है। हालांकि इसके पास कोई अधिकार नहीं है। एेसे में कॉलेज के प्रशासनिक प्राचार्य प्रो. नामदेव हैं और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रो. मक्कड़। दोनों ही प्राचार्य के कार्यालय में बैठते हैं। साथ ही गजब का सांमजस्य है। दोनों ही एक दूसरे के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं।
क्या है मामला
माधव महाविद्यालय के प्राचार्य एलएन वर्मा सेवानिवृत्त हुए। वह प्रो. बीएस मक्कड़ को प्रभार सौंप गए। करीब डेढ़ साल तक मक्कड़ ने जिम्मेदारी को संभाला। इसी दौरान अप्रैल माह में एक माह के अवकाश पर चले गए और प्रभार प्रो.नामदेव को दे गए। अवकाश से लौटने के बाद उन्होंने ज्वाइनिंग दी, लेकिन प्राचार्य का प्रभार नहीं लिया। इसी के बाद से कॉलेज में दो प्राचार्य हो गए।
विभागीय प्राचार्य प्रो. मक्कड़
माधव महाविद्यालय में उच्च शिक्षा विभाग के दस्तावेजों के आधार पर प्रो. मक्कड़ प्राचार्य हैं। मामला उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंचा तो अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग ने इस समस्या का समाधान करने की कोशिश की, लेकिन राजनीति शुरू हो गई। इसके बाद उन्होंने भी खुद को पीछे कर लिया। अब स्थिति यह है कि प्रो. नामदेव के निर्देश पर पूर्व प्राचार्य मक्कड़ वेतन व अन्य वित्तीय फाइल पर हस्ताक्षर कर देते हैं।
आदेश आ रहा है
पूर्व प्राचार्य बीएस मक्कड़ का कहना है कि प्रभार प्रो. नामदेव के पास है। वित्तीय अधिकार मेरे पास हैं। उनकी फाइल अनुमोदन होने के लिए गई है। जल्द ही उनके पास फुल चार्ज होगा। कोई भी प्रशासनिक समस्या नहीं है।
Published on:
20 Jun 2018 12:31 pm
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