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ये है उज्जैन के हाल : 1200 कर्मचारी,भरपूर संसाधन..फिर भी गंदगी

  पत्रिका: स्वच्छता के सिपाही: कई इलाकों में नियमित नहीं उठ रही गदंगी, कचरा गाडिय़ां भी नहीं पहुंचने की शिकायत

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पत्रिका: स्वच्छता के सिपाही: कई इलाकों में नियमित नहीं उठ रही गदंगी, कचरा गाडिय़ां भी नहीं पहुंचने की शिकायत

उज्जैन. शहर को स्वच्छता की रैंकिंग में नंबर एक पर लाने में जुटे नगर निगम के सफाई इंतजामों से शहरवासी खुश नहीं है। शहर में अमूमन हर इलाके में सफाई नहीं होने तो कचरा गाड़ी समय पर नहीं पहुंचने की शिकायत बनी हुई है। जबकि निगम ने शहर में करीब १२०० कर्मचारी सफाई व्यवस्था में लगाए हुए हैं। वहीं हर वार्ड और गली में सफाई के लिए दरोगा से लेकर मेट तक की जिम्मेदारी तय कर रखी है। बावजूद इसके सफाई व्यवस्था का ढर्रा पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है। शहरवासी ही सवाल उठा रहे हैं कि सफाईकर्मियों की इतनी बड़ी फौज, भारी संसाधन फिर भी निगम समय पर कचरा क्यों नहीं उठवा पा रहा है।

पत्रिका के स्वच्छता के सिपाही अभियान के अंतर्गत शहर के विभिन्न इलाकों से लोग अपनी शिकायत पत्रिका को भेज रहे हैं। किसी के घर की नालियां जाम है, कहीं गदंगी के ढेर लगे हुए हैं तो कचरा लेने के लिए वाहन समय पर ही नहीं पहुंच रहे हैं। शिकायतें सामने के बाद भी इनका निराकरण नहीं हो पा रहा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सफाई में जुटा निगम का अमला वास्तविकता में कर क्या रहा है। अधिकारी रोज सुबह ६ बजे वार्ड में जा रहे हैं फिर भी गंदगी क्यों पसरी है। निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने हाल ही में हर वार्ड में सफाई के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए हैं, आखिर यह अधिकारी क्या कर रहे हैं। दरअसल शहर की सफाई इंतजाम दीपावली पूर्व से ही बिगड़े हैं, लगातार शिकायतें मिल रही हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और सफाईकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यही वजह है कि शहरवासी गंदगी की शिकायत करते हैं और निगम अधिकारी अपनी सुविधानुसार सफाई कर रहे हैं। शहरवासी कह रहे हैं कि ऐसी सफाई होती रही तो स्वच्छता की रैंकिंग उज्जैेन एक बार फिर पिछड़ जाएंगा।

मुख्य सड़कों व कॉलोनियों में सफाई, बाकी बेहाल
निगम की ओर से शहर में स्वच्छता अभियान एक तरह से दिखावटी भी साबित हो रहा है। निगम शहर के मुख्य मार्गों व प्रमुख कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था पर ध्यान दे रहा है लेकिन शहर के दूरस्थ कॉलोनी, पिछड़ी बस्तियों, कॉलोनियों के भीतर सफाई व्यवस्था पर ध्यान नहीं है। चूंकि आंतरिक क्षेत्र में निगम के जिम्मेदारी पहुंचते नहीं और सफाईकर्मी मनमानी करते हैं। इसी के चलते शहरवासी लगातार गंदगी व कचरा वाहन नहीं पहुंचने की शिकायत कर रहे हैं।

सफाई के लिए निजी कंपनी भी, फिर भी खामियां
निगम ने शहर में सफाई व्यवस्था के लिए निजी कंपनियों की भी सुविधा ले रखी है। इन कंपनियों में कर्मचारियों के माध्यम से शहर के प्रमुख क्षेत्र व मार्गों की सफाई की जा रही है लेकिन वास्तविकता में यह कंपनियां ठीक से काम नहीं कर रही है। फ्रीगंज में ही नालियों में गंदगी पसरी हुई है। कई बार सफाई भी खानापूर्ति भर हो रही है। जबकि यह कंपनियां नगर निगम से सफाई के नाम पर बड़ी राशि ले रही है।

वार्डों में सफाई इंतजाम इनके भरोसे
- सफाई इंतजाम देखने एक नोडल अधिकारी
- कर्मचारियों की देखरेख के लिए दरोगा
- सफाईकर्मियों के ऊपर एक मेट
- वार्ड की प्रमुख चौराहे व मार्गों के लिए सफाई कर्मी
- वार्ड के क्षेत्रफल के मान से दो से तीन कचरा गाड़ी, इन पर भी सफाईकर्मी तैनात
- प्रत्येक वार्ड में १० से १५ के बीच सफाईकर्मी। बॉक्स में लगाएं

शिकायत की लेकिन अब तक नहीं हुई सफाई

- देवासरोड स्थित शांति परिसर के रहवासी गंदगी से परेशान हैं। यहां रहवासी खुद सड़क साफ कर रहे हैं। नालियों व खाली भूखंडों को कचरे के ढेर हैं और मच्छरों से रहवासी परेशान हैं। लोगों ने शिकायत की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।

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- मक्सी रोड स्थित खंडलेवाल नगर एक सेक्टर में खाली भूखंडों पर कचरे के ढेर पड़े हैं। नालियां जाम होकर ठीक से साफ नहीं हो रही है। क्षेत्र के बीएल मालवीय का कहना है कि गंदगी व मच्छरों के कारण रहवासी बीमार हो रहे हैं।
- वार्ड नंबर ३ बापू नगर में चार दिन से कचरा गाड़ी नहीं आई है। यहां रहवासी अपने घरों में ही कचरा रखने को मजबूर हैं। वहीं नालियां साफ हुई है लेकिन इन्हें उठाया नहीं गया है। पूरी गली गंदगी से भरी पड़ी है।

- देवास रोड स्थित नागझिरी के पास इंदिरानगर में गंदगी की समस्या बनी हुई है। यहां पर खाली जगहों पर बड़ी मात्रा में कचरा फैला हुआ है। रहवासियों ने जिम्मेदारों से शिकायत भी की है लेकिन अब तक सफाई नहीं हो पाई है।
- देसाई नगर स्थित निगम के कॉम्प्लेक्स के पीछे ही कचरे का ढेर पड़ा हुआ है। यहां मिट्टी के बड़े-बड़े टीले हो गए हैं। गंदगी की वजह से बदबू उठ रही है और मच्छरों से परेशान हैं। क्षेत्रीय पार्षद राजश्री जोशी से भी लोग शिकायत कर चुके हैं लेकिन अब तक कचरा नहीं उठ सका है।

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सीधी बात

प्रतिभा पाल, आयुक्त, नगर निगम उज्जैन
पत्रिका - उज्जैन को नंबर वन बनाने के लिए आपकी क्या प्लानिंग है ?
निगमायुक्त- स्वच्छता सर्वेक्षण के पैरामीटर तय हैं। हम डोर-टू-डोर कचरा उठाने के साथ कचरा कम हो इसके प्रयास कर रहे हैं। सूखा कचरा लेने और प्लास्टिक खत्म करने पर भी काम कर हैं। सीधे कहें तो ३ आर पर काम कर रहे हैं।
पत्रिका- ऐसा तो शहर में कुछ नजर नहीं आ रहा है। हर क्षेत्र में गंदगी की निरंतर शिकायत आ रही है।
निगमायुक्त- सफाई को लेकर लोग जागरुक हो रहे हैं। इसलिए गंदगी को देख शिकायत कर रहे हैं, यह अच्छी बात है। फिर भी हम निरंतर सफाई व्यवस्था में जुटे हैं।
पत्रिका- सवाल इस बात का नहीं कि शिकायत आ रही है, बल्कि ऐसी नौबत क्यों बन रही की शिकायत आए ?
निगमायुक्त- इतना बड़ा शहर है। कचरे को लेकर लोगों को भी अपनी सहभागिता दिखाना होगी। वैसे हमें शिकायत मिलती है तो हम तुरंत सफाई करवाते हैं।
पत्रिका - पत्रिका स्वच्छता के सिपाही अभियान के माध्यम से समस्या से अवगत करा रहा है। इन शिकायतों के बाद कितने कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई अथवा अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया गया ?
निगमायुक्त- सफाई को लेकर निरंतर मॉनीटरिंग कर रहे हैं। गंदगी फैलाने वालों पर लगातार चालानी कार्रवाई कर रहे हैं। कर्मचारियों को भी हिदायत दे रहे हैं, अगर कहीं लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई भी कर रहे हैं।
पत्रिका - सफाई ही नहीं, कचरा गाड़ी भी समय पर न पहुंचने या कई दिन तक न पहुंचने की भी शिकायतें आ रही हैं। कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई ?
निगमायुक्त- दीपावली के समय कचरा गाड़ी समय पर नहीं पहुंचने की शिकायत थी। उस समय ज्यादा कचरा निकलने के कारण गाडिय़ों को दो-तीन फेरे लगाने पड़ रहे थे। अब व्यवस्था ठीक है। इसके बावजूद भी कंपनी पर हमने जुर्माने की कार्रवाई की है।
पत्रिका- यदि कार्रवाई की गई तो व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं आया ?
निगमायुक्त- शहर में सफाई हो रही है। कचरा वाहन भी निरंतर पहुंच रहे हैं। अगले कुछ दिनों में और भी बेहतर सफाई देखने को मिलेगी।