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हमेशा से उपेक्षा का केंद्र रहा सती माता का यह मंदिर

महाकाल मंदिर के आसपास चल रहे निर्माण कार्यों में प्राचीन धरोहरों का न हो विनाश

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उज्जैन. महाकाल मंदिर के प्रमुख गेट पर स्थापित अति प्राचीन माता सती का यह मंदिर प्रशासन की नजरों में हमेशा से उपेक्षा का ही केंद्र रहा है। मंदिर के आसपास जब खुदाई नहीं हुई थी, चारों तरफ बैरिकेड्स थे जहां से दर्शनार्थियों की भीड़ निकलती थी, लेकिन मंदिर के पीछे से यह भीड़ निकाली जाती थी, उस समय दर्शनार्थियों को इनके दर्शन भी नहीं हो पाते थे। बारिश में इस मंदिर की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई, छत हमेशा टपकती रहती थी, जिससे प्रतिमा को खराब होने का डर बना रहता था, तब भी प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब कि स्मार्ट सिटी के चलते मृदा प्रोजेक्ट के तहत यहां सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य चल रहे हैं, तो मंदिर को हटाने की बात कही जा रही है।

स्मार्ट सिटी के तहत महाकालेश्वर मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र का विकास कार्य चल रहा है, जिसके तहत महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर वर्षों से स्थापित सती माता के मंदिर को हटाने की कवायद की जा रही है। पूर्व में भी इस प्रतिमा को हटाने के विरोध में धर्म शास्त्री और विद्वानों ने अपनी बात प्रशासन के सामने रखी थी कि यदि प्रतिमा को हटा दिया जाएगा, तो उसके दुष्परिणाम हम सभी को भोगने पड़ सकते हैं, क्योंकि ये वही सती माता हैं, जिनकी वजह से भगवान शिव ने रौद्र रूप धारण कर लिया था। उनके अधजले शरीर को उठाकर वे जहां-जहां भी गए, वहां-वहां आज शक्तिपीठ स्थापित हैं।

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प्रतिष्ठित प्रतिमाओं को अन्यत्र रखा जा रहा
प्रशासन द्वारा इस मंदिर को हटाने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। कभी भी जेसीबी लाकर इसे जमींदोज कर सकते हैं। इससे पहले भी यहां कई छोटे-बड़े मंदिरों को हटाया जा चुका है, उनमें स्थापित प्राण प्रतिष्ठित प्रतिमाओं को यहां-वहां रखा जा रहा है। इसमें धर्मशास्त्रियों और यहां के विद्वानों का कहना है कि जितना विस्तार नहीं हो रहा है, उससे ज्यादा विनाश किया जा रहा है। शहर के प्राचीन धरोहर और प्राण प्रतिष्ठित प्रतिमाओं को अपने स्थान से हटाकर अन्यत्र जगह रखा जा रहा है, जो सनातन धर्म के विपरीत है।

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