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वर्ष में दो बार बदलता है महाकाल आरती का समय, जानिए क्यों होता है ऐसा…

भस्मारती, संध्या पूजन व शयन आरती में कोई परिवर्तन नहीं...

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उज्जैन. कार्तिक मास शुरू होते ही राजाधिराज की आरती के समय में परिवर्तन हो जाएगा। ६ अक्टूबर से महाकाल मंदिर में परिवर्तित समय के अनुसार आरती की जाएगी। कार्तिक महीने में स्नान का महत्व है। श्रद्धालु इस पावन महीने में सूर्योदय के पूर्व स्नान के बाद बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ लेते हैं। कार्तिक पूर्णिमा से शीत ऋतु का आगमन माना जाता है। इसके चलते प्रतिवर्ष इस महीने में महाकाल की तीन आरती के समय में परिवर्तन किया जाता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा 6 अक्टूबर से मंदिर में तीन आरतियों का समय बदलेगा।


वर्ष में दो बार आरतियों के समय में बदलाव होता है। शुक्रवार से होने वाला यह बदलाव कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक लागू रहेगा।

आज दूध का भोग- आशीष पुजारी ने बताया शरद पूर्णिमा पर गुरुवार को पुजारी -पुरोहित उत्सव मनाएंगे। संध्या आरती में बाबा का शृंगार कर दूध का भोग लगेगा।

यह रहेगा आरती का समय
महाकाल मंदिर के आशीष पुजारी ने बताया कि सुबह की दद्योदक आरती सुबह 7.30 से 8.15 बजे तक भोग आरती सुबह 10.30 से 11.15 बजे तक, संध्या आरती शाम 6.30 से 7.15 बजे तक होगी। इसके अलावा भस्मारती प्रतिदिन की तरह तड़के 4 बजे,संध्या पूजा शाम 5 बजे व शयन आरती रात १०.३० बजे ही होगी।

कार्तिक एवं अगहन मास में सवारी २३ से- भगवान महाकालेश्वर की कार्तिक एवं अगहन मास में निकलने वाली सवारियां २३ अक्टूबर से प्रारंभ होगी। प्रथम सवारी सोमवार 23 अक्टूबर, द्वितीय सवारी 30 अक्टूबर, तृतीय सवारी 06 नवंबर तथा शाही सवारी 13 नवंबर को निकलेंगी। हरिहर मिलन की सवारी 02 नवंबर को निकाली जाएगी।

१७१ में से १४० लोगों को सांस रोग, ब्रोंकिल अस्थमा और नोजल एलर्जी से पीडि़त
उज्जैन. महाकाल मंदिर समिति की ओर से मंदिर के सेवक और उनके परिजनों के लिए एलर्जी एवं श्वास रोग परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया गया। इसमें १७१ में से १४० श्वास रोग, ब्रोंकिल अस्थमा और नोजल एलर्जी से पीडि़त पाए गए हैं। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के फेसिलिटी सेन्टर में चिकित्सा इकाई परिसर में एलर्जी एवं श्वास रोग की जांच एवं नि:शुल्क दवाई वितरण शिविर आयोजित किया गया। महाकाल मंदिर के चिकित्सा इकाई के चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र परमार ने बताया कि शिविर में 171 व्यक्तियों की जांच की गई। इसमें 55 श्वास रोग ब्रोंकिल 40 अस्थमा और 45 नोजल एलर्जी से प्रभावित पाए गए।

प्रभावितों को चिकित्सको ने परामर्श, उपचार और दवाइयां दी। शिविर में आर्डीगार्डी मेडिकल कॉलेज के श्वास रोग विभाग के एचओडी डॉ.एचजी वरूणकर के निर्देशन में डॉ. स्वप्निल, डॉ. महेन्द्र, डॉ. नवदीप आदि ने पीएफटी, टीबी, श्वास, एलर्जी, फेफडों से संबंधित बीमारी की जांच की गई। शिविर का शुभारंभ मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य विभाष उपाध्याय, पं.प्रदीप गुरु ने किया।