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उज्जैन@शैलेष व्यास. दूध उत्पादन में उज्जैन प्रदेश अग्रणी शहरों में शुमार है। यह बेहतर गुणवत्ता और स्वाद का असर है कि यहां का दूध शहर की आपूर्ति को पूर्ण करता है। उज्जैन दुग्ध संघ से प्रतिदिन हजारों लीटर दूध दिल्ली और मुम्बई भेजा जाता है। इसके अलावा शहर में तकरीबन ३.५० लाख लीटर दूध की खपत होती है। इसके अलावा हजारों लीटर दूध से रोजाना अनेेक सामग्री का निर्माण होता है।
दूध उत्पादन और विक्रय में उज्जैन का खासा महत्व तो है, इसकी मांग भी बहुत अधिक है। पिछले कुछ समय से जिले में दूध उत्पादन के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। तुलनात्मक तौर पर यहां का दूध अन्य स्थानों से बेहतर माना जाता है। यही वजह कि दूध संघ उज्जैन द्वारा प्रतिदिन दिल्ली और मुम्बई को टैंकरों के माध्यम से दूध सप्लाय किया जा रहा है।
दूध संग्रहण में अग्रणी संघ
उज्जैन दुग्ध संघ प्रदेश के अन्य संघ से दूध संग्रहण में अग्रणी है और यहां की भैंस के सफेद दूध की मुम्बई में खास मांग भी है। दुग्ध संघ लगभग ५२ हजार दूध उत्पादकों को दूध ११४८ दुग्ध समितियों के माध्यम से करता है। इसे प्रोसेसिंग के बाद विक्रय के अलावा अन्य दूध उत्पाद तैयार कर बेचता है। उज्जैन दुग्ध संघ के सीइओ एसके श्रीवास्तव के अनुसार दुग्ध संघ द्वारा प्रतिदिन १.७३ लाख लीटर दूध प्रोसेस किया जा रहा है। इसमें से करीब ६५ हजार लीटर उज्जैन और आसपास के पार्लर के माध्यम से बेचा जा रहा है। इसकेअलावा प्रतिदिन २५ हजार लीटर मदर डेयरी दिल्ली, १० हजार लीटर दिल्ली मिल्क स्कीम, और २५ हजार लीटर दूध मुम्बई को अनुबंध के तहत सप्लाय किया जाता है। शेष दूध से संघ के अन्य उत्पाद मसलन मावा, घी, मक्खन, चक्का, लस्सी, छाछ, फ्लेवर्ड मिल्क पेड़ा तैयार करता है। यह उत्पाद मांग के अनुसार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
शहर में कभी दूध की कमी नही
सिर्फ दुग्ध संघ ही नहीं शहर में डेयरी और दूध उत्पादक स्वयं या हॉकर के माध्यम से खेरची दूध का विक्रय करते हैं। एक जानकारी के अनुसार शहर सीमा के १० से १५ किमी दायरे से करीब २ लाख लीटर दूध सीधे घरों और अन्य स्थानों पर दैनिक उपयोग के लिए वितरित होता है। इसके अलावा विभिन्न डेयरियों से करीब १ लाख लीटर दूध का विक्रय होता है। शहर के अनेक बड़े मिठाई निर्माता तो दूध उत्पादकों से ही सीधे खरीदी करते हैं। दूध का इतना अधिक उत्पादन होता है कि हाल के वर्षों में कभी भी दूध की कमी नहीं हुई है।
दूध में मिलावट के बारे में जानिए
पानी की मिलावट: एक प्लेट या ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालें, शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे सफेद लकीर छोड़ते हुए नीचे आ जाएंगी, जबकि पानी की मिलवाट वाली बूंद बिना कोई निशान छोड़े बह जाएंगी। दूध में पानी की मिलावट की जांच करने के लिए किसी चिकनी लकड़ी या पत्थर की सतह पर दूध की एक या दो बूंद टपकाएं अगर दूध बहता हुआ नीचे की तरफ गिरे और सफेद धार-सा निशान बन जाए तो दूध शुद्ध है।
यूरिया की मिलावट की जांच
एक चम्मच दूध को टेस्ट ट्यूब में डालें, उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालें। इसे अच्छी तरह से मिला लें। पांच मिनट बाद एक लाल लिटमस पेपर डाले। आधे मिनट बाद अगर पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए, तो दूध में यूरिया है।
डिटर्जेंटवाला दूध
दूध को सूंघें अगर उसमें साबुन जैसी गंध आए, तो समझिए कि दूध में मिलावट की गई है। 5 से 10 मिली लीटर दूध को उतने ही पानी में मिला के हिलाएं, अगर झाग बनते हैं, तो समझ लें कि इसमें डिटर्जेंट है।
सिंथेटिक दूध
सिंथेटिक दूध का स्वाद कड़वा होता है। उंगलियों के बीच रगडऩे से साबुन जैसा लगता है और गर्म करने पर पीला हो जाता है। दूध में प्रोटीन की मात्रा है या नहीं, इसकी जांच दवा की दुकान पर मिलनेवाली यूरीज स्ट्रिप से की जा सकती है। इसके साथ मिली रंगों की सूची दूध में यूरिया की मात्रा बता देगी। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद मिलावट होने की वजह से कड़वा हो जाता है।
दिल्ली को गाय का दूध सप्लाई होगा
उज्जैन दुग्ध संघ जल्द ही गाय का दूध भी प्रोसेसिंग के बाद अन्य शहरों को सप्लाय करने जा रहा है। दुग्ध संघ के सीइओ श्रीवास्तव ने बताया कि दिल्ली के साथ अन्य मेट्रो सिटी में गाय के दूध की भी बहुत मांग है। प्रथम चरण में दिल्ली को करीब १० हजार लीटर गाय का दूध सप्लाई किए जाने की योजना है। इसके लिए मंदसौर जिले की मनासा तहसील में दुग्ध समितियों को तैयार किया गया है। दिल्ली सरकार के दल ने सर्वे के साथ जांच कर दूध को एप्रूव कर दिया है। अनुबंध होते ही गाय का दूध भी सप्लाय होने लगेगा।
Updated on:
01 Jun 2018 06:20 pm
Published on:
01 Jun 2018 08:02 am
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