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धूल खा रहे भंगार को कलाकारों ने बना दिया इतना आकर्षक…

भंगार के लोहे-स्टील से तैयार हो रहीं अनूठी आकृतियां, दिल्ली-बंगाल के कारीगर दे रहे आकार

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राहुल कटारिया@उज्जैन. आने वाले समय में शहरवासियों कुछ नई कलाकृतियां देखने को मिलेंगी। इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। खास बात यह है कि ये सभी कलाकृतियां कबाड़ में धूल खा रहे भंगार से निर्मित की जा रही हैं। इसके लिए खासतौर पर दिल्ली व बंगाल से कारीगर बुलाए गए हैं। अभी तक कई कलाकृतियां बनकर तैयार भी हो चुकी हैं, तो कुछ पर रंग-रोगन का काम बाकी है।

शहर में पहली बार
शहर में पहली बार नगर निगम भंगार के लोहे-स्टील व अन्य सामग्री से अनूठी आकृतियां तैयार करवा रहा है। अब तक डिपो में धूल खा रहे इस सामान से बनीं आकृतियां चौराहों व रोटरियों की सुंदरता बढ़ाएंगी। दिल्ली व बंगाल के कारीगर भंगार को नया आकार देने में जुटे हैं। शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाने के लिए कुल ३० आकृतियां रूप लेंगी। इसे तैयार कर रहे ठेकेदार द्वारा ही तय स्थानों पर इन्हें लगाया जाएगा।

वेस्ट मटेरियल को बना रहे बेस्ट...
निगम के मक्सी रोड डिपो में वर्षों से पड़े वाहनों के भंगार, लोहा-लंगर व अन्य वेस्ट मैटेरियल से ये आकृतियां तैयार की जा रही हैं। पहली बार इस तरह का प्रयोग शहर में किया जा रहा है। अब तब मेट्रो सिटी मंे ही इस तरह के काम कराए जाते हैं, लेकिन अब सरकार की मंशा अनुरूप अन्य शहरों में भी एेसे काम हो रहे हैं।

1.30 करोड़ का खर्च होगा
इस काम में 1.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ठेकेदार को आकृतियां तैयार करने के साथ ही इनके पेडस्टल, स्ट्रक्चर तैयार करना है और इन्हें सुंदर बनाकर लगाना भी है। निगमायुक्त प्रतिभा पाल के अनुसार जनवरी से इन स्क्ल्पचर को प्रमुख स्थलों पर लगवाने का काम शुरू कराएंगे। ये जहां लगेंगे वहां सौंदर्यीकरण के अन्य काम भी होंगे।

इस तरह की आकृतियां ले रही रूप
- शहर को धार्मिक स्वरूप प्रदर्शित करने के लिए विशाल डमरू व त्रिशूल। ये महामृत्युंजय द्वार के पास लगना संभावित है।

- प्रसिद्ध प्राचीन कथा विक्रम-बेताल की आकृति, जिसमें विक्रम के कंधे पर बैठा है बेताल।

- कलम-दवात व किताब, मां की गोद में बैठा नवजात, मयूर आकृति, सितार, ढोलक व अन्य वाद्य यंत्र।

- इनके सहित कुल ३० आकृतियां तैयार कराई जा रही हैं।