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न बीपी-शुगर, न फैमिली हिस्ट्री, फिर भी आ रहे अटैक, क्यों चलते-फिरते दम तोड़ रहे लोग

locationउज्जैनPublished: Feb 03, 2024 12:04:20 pm

Submitted by:

deepak deewan

उज्जैन के देवासगेट होटल कर्मचारी को अचानक सीने में दर्द उठा और वह नीचे गिर गया। होटल मालिक और अन्य लोग उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तब तक मौत हो चुकी थी। इसी तरह भूखीमाता क्षेत्र में फतेहाबाद के सब्जी विक्रेता का शव मिला था। डॉक्टर का कहना है कि दोनों की हार्ट अटैक से मौत की आशंका है।

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साइलेंट हार्ट अटैक

उज्जैन के देवासगेट होटल कर्मचारी को अचानक सीने में दर्द उठा और वह नीचे गिर गया। होटल मालिक और अन्य लोग उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तब तक मौत हो चुकी थी। इसी तरह भूखीमाता क्षेत्र में फतेहाबाद के सब्जी विक्रेता का शव मिला था। डॉक्टर का कहना है कि दोनों की हार्ट अटैक से मौत की आशंका है।

देवासगेट पुलिस ने बताया कि आगर जिले के अहिरबड़ल्या निवासी भरत यादव देवासगेट की कृष्ण विहार होटल पर काम करता था। रात को उसकी हालत खराब हुई और मौत हो गई। इसी तरह महाकाल थाना इलाके में भूखीमाता क्षेत्र में युवक कान्हा उर्फ कन्हैया सिसौदिया मृत मिला था। आशंका है कि युवक को चलती बाइक पर हार्ट अटैक आया और उसकी मौत हो गई।

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दोनों मौतों को लेकर हर कोई हैरान है। डॉक्टर इन्हें साइलेंट हार्ट अटैक के मामले बता रहे हैं। साइलेंट अटैक के ऐसे चौंकाने वाले मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सभी को सचेत होने की जरूरत इसलिए और ज्यादा हो गई है क्योंकि कई मामलों में मरीज के साथ कोई रिस्क फैक्टर नहीं था। मसलन बीपी-शुगर, मोटापा, धूम्रपान या अनुवांशिक जैसी कोई हिस्ट्री नहीं होने के बावजूद मरीज को साइलेंट अटैक। ऐसे मामलों मेें चिकित्सक कोरोना व खराब जीवनशैली को भी बड़ा कारण मान रहे हैं।

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साइलेंट अटैक के ऐसे मामले अलर्ट कर रहे हैं। इस सीजन में उल्लेखनीय सर्दी नहीं होने बावजूद शहर में साइलेंट अटैक की एक दर्जन से ज्यादा घटनाएं प्रकाश में आईं। इनमें से कई मरीज 40 वर्ष से भी कम उम्र के थे। स्वस्थ दिखने वाले युवा भी अचानक हृदयघात के शिकार हो रहे हैं, विशेषज्ञ भी इससे चिंतित हैं।

चिकित्सक भी मान रहे हैं कि अटैक से संबंधित कॉमन रिस्क फेक्टर के अलावा कोविड के साइड इफैक्ट बड़ा कारण हो सकता है। चिकित्सक यह भी मानते हैं कि अटैक की आशंकित खतरे से बचने के लिए जो उपाय किए जा सकते हैं, आम मरीज ही नहीं स्वस्थ्य व्यक्ति को भी जरूर करना चाहिए। इसमें सेहत के प्रति जागरुक होना महत्सवूर्ण है।

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हम मोडिफायबल रिस्क फैक्टर कम करें
डीएम कॉर्डियोलॉजी डॉ. राज शर्मा बताते हैं कि मोटापा, शुगर, बीपी, धूम्रपान, तनाव या अनुवांशिक जैसे कारण हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर माने जाते हैं। साइलेंट अटैक के केस बढ़े हैं और कई मामलों में इन रिस्क फैक्टर की हिस्ट्री नहीं मिली है। कोरोना का सेहत पर असर हुआ, जिसके साइड इफैक्ट अब भी मिल रहे हैं। कॉमन रिस्क फेक्टर के अलावा भागदौड़ या अव्यवस्थित जीवनशैली और कोविड इफैक्ट भी हृदयघात के कारणों के रूप में नजरअंदाज नहीं किए जा सकते हैं।

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डॉ. शर्मा बताते हैं कि एक वर्ष पूर्व 22 वर्ष की युवती को साइलेंट अटैक आया था। रिस्क फैक्टर की हिस्ट्री नहीं थी। रिस्क फैक्टर दो प्रकार के होते हैं मोडिफायबल व नॉन मोडिफायबल। नॉन मोडिफायबल में अनुवांशिक रोग, अधिक उम्र जैसे रिस्क फैक्टर हैं जिनसे बचने को कुछ नहीं कर सकते। मोडिफायबल रिस्क फैक्टर में मोटापा, धूम्रपान, शुगर-बीपी, अव्यवस्थित दिनचर्या आदि हैं। इनके खतरों को कम करना हमारे हाथ में हैं। शुगर-बीपी है तो इन्हें कंट्रोल में रखकर व सेहत के प्रति जागरूक रहकर हार्ट अटैक की मोडिफायबल रिस्क कम करें।

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बचाव के लिए करें
व्यायाम, योग करें।
धूम्रपान, नशे आदि से बचें।
तनाव मुक्त जीवन का प्रयास करें।
खान-पान पौष्टिक व व्यवस्थित करें।
नियमित जांच करवाएं।
शुगर-बीपी आदि समस्या है तो नियमित दवा लें।
स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

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