
क्यों कार्यमुक्त हो गए पाणिनी विश्वविद्यालय के कुलपति
उज्जैन. महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेशचंद्र पांडा सोमवार को कार्यमुक्त हो गए। पांडा का चार वर्षीय कार्यकाल पूरा हो गया। इसी के चलते राजभवन ने डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर विवि महू की कुलपति आशा शुक्ला को कार्यवाहक कुलपति के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। सोमवार को राजभवन से उक्त संबंध में आदेश आ गया। इसी के साथ पांडा का विदाई समारोह भी आयोजित किया गया। इस दौरान शिक्षक, विद्यार्थी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
पाणिनि विवि के कुलपति चयन के लिए राजभवन ने ३ अक्टूबर को अधिसूचना वेबसाइट पर जारी की। इसी बीच प्रदेश में आचार संहिता प्रभावी हो गई और विज्ञापन प्रकाशित नहीं हो सका। इसके बाद प्रक्रिया थम गई। आचार संहिता हटने के बाद १७ दिसंबर को विज्ञापन प्रकाशित किया गया। इसके बाद अंतिम तारीख भी बढ़ाई गई। इसके तहत कुलपति पद के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख १६ जनवरी निर्धारित की गई। एेसे में कुलपति सर्च कमेटी की बैठक आयोजित होने में समय लग गया और कुलपति पांडा का कार्यकाल पूरा हो गया।
नियुक्तियों के लिए विवादित रहा कार्यकाल
पाणिनी विवि में संस्कृत से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित होते हंै। इस कारण छात्रों की संख्या काफी कम है, लेकिन पाणिनि विवि के मौजूदा कुलपति रमेशचंद्र पांडा का कार्यकाल नियुक्तियों के लिए विवादित रहा। विवि में संस्कृत भाषा के लिए केंद्र स्थापित किया गया। इसके निदेशक पद पर संस्कार भारती के पूर्व प्रचारक मनमोहन उपाध्याय की नियुक्ति हुई, जो काफी विवादित रही। इसी तरह वर्ष २०१६ में गैर शिक्षकीय पद पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई। इस प्रक्रिया के लगभग पूरा होने के बाद रोस्टर विवाद गया है। कुलपति जाते-जाते उक्त विज्ञापन और प्रक्रिया को निरस्त कर गए और न्यायायल में केविएट भी लगा गए।
Published on:
12 Feb 2019 09:00 am
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