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18 साल से हिमालय पर कर रहे तपस्या, बर्फ तोड़कर पीते हैं पानी

हिमालय में हजारों किलोमीटर की ऊंचाई पर मणि महेश कैलाश पर्वत पर जाने की सबकी ख्वाहिश होती है, लेकिन यहां हर कोई नहीं पहुंच पाता है।

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Lalit Saxena

Mar 11, 2016

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उज्जैन. हिमालय में हजारों किलोमीटर की ऊंचाई पर मणि महेश कैलाश पर्वत पर जाने की सबकी ख्वाहिश होती है, लेकिन यहां हर कोई नहीं पहुंच पाता है। इसी जगह साल में एक बार राधा अष्टमी पर हिमाचल प्रदेश के चंबा में स्थित प्राचीन लक्ष्मीनारायण मंदिर से दशनामी अखाड़े छड़ी लेकर पहुंचते हैं। इसी पर्वत पर एक साधु नग्न अवस्था में 18 साल से शून्य तापमान में किसी अडिग गिरी (पर्वत) की तरह तप-साधना कर रहे हैं। वे हैं श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़े के खूनी नागा महंत आकाशगिरि, जो पर्वत पर ही बर्फ को तोड़कर पानी पीते हैं, भूख लगे तो फल खाकर धूनी रमाते हैं। हाल ही में वे शहर पहुंचे हैं।

छड़ी और त्रिशूल करते हैं सुरक्षा
हाथों में तेजबल की छड़ी और त्रिशूल इनकी 24 घंटे सुरक्षा करते हैं। तेजबल की छड़ी इन्हें तेज और बल प्रदान करती है तो त्रिशूल इनकी जंगलों में जानवरों से रक्षा करता है। पत्रिका से विशेष चर्चा में छड़ी और त्रिशूल के बारे में बाबा ने बताया कि छड़ी से कई चमत्कार होते हैं, जिनका प्रयोग कभी-कभी किया जाता है। छड़ी से कई बीमारियां दूर होती हैं। यह छड़ी उत्तराखंड के जंगलों में एक हजार पेड़ में से एक में पाई जाती है। इसे घर में रखने से सर्प, जीव-जंतु बीमारियां, बुरी बला नहीं आती। छड़ी के बारे में बताते हुए कहा कि 18 साल से यह छड़ी साथ है। त्रिशूल के बारे में बाबा कहते हैं कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास है। यह हमेशा साथ रहते हैं। त्रिशुल में लगी एक छोटी सी कावड़ के बारे में उनका कहना है कि इसमें गंगा मैया का पानी है।

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धरती, आकाश, पाताल हैं इनके गुरुभाई
अखाड़े में गुरु भाई की पंरपरा लंबे समय से चली आ रही है। संस्कार होने के बाद पांच गुरु बनाए जाते हैं, जिसमें एक गुरु अपने चेले को गुरु मंत्र देता है। इसके साथ ही कई गुरुभाई बनाए जाते हैं। महंत आकाशगिरि के भी करीब दस गुरुभाई हैं। महंत ने बताया महाकालगिरि, गगनगिरि, पातालगिरि, पृथ्वीगिरि, देवगिरि, कैलाशगिरि, मंगलगिरि, गुलाबगिरि और रघुवीरगिरि उनके गुरुभाई हैं। वहीं एक दिगंबर गुरु भाई भी हैं जिनका नाम उज्जैनगिरि है।

महाकाल नगरी में खूनी नागा
हिमालय में मणि कैलाश पर्वत पर रहने वाले महंत आकाशगिरि 36 साल पहले 1980 के सिंहस्थ में आवाहन अखाड़े में महाकाल की नगरी में ही खूनी नागा बने थे। महंत ने बताया उनके गुरु महंत भोलागिरि बापू हैं, जो 46 साल से उद्र्धबाहु हठ योग कर रहे हैं।

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