अखाड़े में गुरु भाई की पंरपरा लंबे समय से चली आ रही है। संस्कार होने के बाद पांच गुरु बनाए जाते हैं, जिसमें एक गुरु अपने चेले को गुरु मंत्र देता है। इसके साथ ही कई गुरुभाई बनाए जाते हैं। महंत आकाशगिरि के भी करीब दस गुरुभाई हैं। महंत ने बताया महाकालगिरि, गगनगिरि, पातालगिरि, पृथ्वीगिरि, देवगिरि, कैलाशगिरि, मंगलगिरि, गुलाबगिरि और रघुवीरगिरि उनके गुरुभाई हैं। वहीं एक दिगंबर गुरु भाई भी हैं जिनका नाम उज्जैनगिरि है।