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30 शाला भवन बदहाल, 18 स्कूलें भवनविहीन

शिक्षक व छात्र हो रहे परेशान

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30 school building badhal, 18 schools without buildings

30 school building badhal, 18 schools without buildings

उमरिया. जिले में संचालित 123 स्कूलों में लगभग 30 की संख्या में स्कूलों के भवन बदहाल हैं। 18 स्कूलें ऐसी हैं जिनके अपने भवन ही नहीं हैं। इस स्थिति में यहां पढऩे वाले पांच हजार से भी अधिक बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शिक्षा विभाग की अधीनस्थ इन स्कूलों की न तो मानीटरिंग की जा रही है और न जरूरी निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे इस वर्ष पुन: नए सत्र से बच्चों को पुरानी परेशानियों से जूझना पड़ेगा। बताया गया है कि शासन द्वारा राष्ट्रीय माध्यमिक शाला मद से 75 हजार रुपए सालाना स्कूलों के रखरखाव के लिए बजट भी आवंटित किया जाता है। इसके बावजूद उपेक्षा बरती जाती है। पेयजल व निस्तार की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। ज्ञातव्य हो कि 16 जून से शुरू हुये नए शिक्षा सत्र से पहले सभी हाई स्कूल व हायर सेकण्डरी स्कूलों का रंग रोगन, साफ सफाई और जीर्णोद्धार के साथ समुचित रखरखाव करने संबंधी शासन के निर्देशों के बावजूद अभी तक स्कूलों में सुधार की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है जबकि एक जुलाई से शिक्षा सत्र प्रारंभ हो गया है।
वर्षों से जर्जर हैं भवन
जिले के ग्रामीण अंचलों व कुछ शहरी क्षेत्रों में संचालित लगभग 30 स्कूलों की हालत वर्षों से बदहाल है। इनमें अमरपुर हायर सेकेण्डरी, हायर सेकण्डरी ताला, उत्कृष्ट स्कूल मानपुर, चंदिया के बालक व बालिका दोनो हायर सेकण्डरी स्कूल भवन अत्यंत जर्जर हालत में हैं। यहां भवनों की छत से बरसात के समय पानी सीपेज होकर अंदर कमरों में घुसता है और पढ़ाई प्रभावित होती है। छतों की प्लास्टर उखड़ी हुई है। खिडक़ी दरवाजे टूटे जर्जर हैं, फर्श उखड़ा हुआ है, लेकिन मरम्मत नहीं कराई जा रही है। बताया गया कि चंदिया में प्रवास के दौरान मुख्य मंत्री ने शाला जीर्णोद्धार की घोषणा की थी।
स्कूलों में निस्तार व पेयजल का अभाव
स्कूल भवन तो बदहाल हैं ही साथ ही पेयजल व निस्तार की भी परेशानियां बनी हुई हैं। स्कूलों में वर्षों पुरानी पानी की टंकियां बनी हुई हैं, जिनकी कभी साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। उसी का गंदा पानी बच्चोंं को पीना पड़ता है। कई स्कूलेें ऐसी हैं जहां निस्तार की सुविधा नहीं है। वर्षों पुराने शौचालय बने हैं, पेशाबघर हैं, लेकिन वहां साफ सफाई नहीं है। इनके कमरे जर्जर हो चुके हैं। कुछ शौचालयों में दरवाजे निकल गए हैं, जो अब निस्तार योग्य भी नहीं रह गए हैं। जिन स्कूलों में नए शौचालय बने हैं, वहां दरवाजे ऐसे लगाए गए हैं। जो ठीक से बंद ही नहीं होते। इसके अलावा शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है। स्कूलों के शौचालयों में नल कनेक्शन और ओवर हेड टैंक रखने काफी पहले शासन ने निर्देश दिया था, लेकिन आज तक उसका पालन नहीं किया गया। परिणामत: आज भी छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ समस्याओं के निराकरण के लिए पत्राचार किया गया, लेकिन आगे कार्रवाई नहीं की गई।
सुधार के नहीं हुए प्रयास
कुछ पुरानी तथा ऐसी स्कूलें जिनका कुछ वर्षों पूर्व माध्यमिक शालाओं से हाई स्कूल में उन्नयन हुआ था आज भी भवन विहीन हैं। यह सभी लगभग 18 स्कूलें माध्यमिक शालाओं के भवन में ही संचालित हो रही हैं। यहां जगह की कमी पडऩे के कारण बच्चों से ठीक से बैठते भी नही बनता है। भवनविहीन शालाओं में बड़ेरी, परासी, बसकुटा, चेचरिया, नया गांव, देवरी, कन्या कौडिय़ा आदि बताई जातीं हैं। सुधार के प्रयास नहीं हुए।
धीमी गति से चल रहा कार्य
नया गांव में हायर सेकण्डरी स्कूल का भवन बनवाया जा रहा है, लेकिन उसके कार्य में गति नही है। वह मंथर गति से चल रहा है। उसके पूर्ण होने के बाद उसके हैण्डओवर की प्रक्रिया की जाएगी और बच्चों के बैठने के लिए टेबिल कुर्सी तथा अन्य स्कूल फर्नीचर की व्यवस्था करनी पड़ेगी। कुल मिलाकर इस वर्ष भी नया गांव के बच्चों को नया शाला भवन उपलब्ध होने वाला नहीं। उन्हे पूर्व की भांति ही माध्यमिक शाला में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ेगी।
इनका कहना है
शाला भवनों का जीर्णोद्धार बहुत ही जल्द कराया जा रहा है। इस संबंध में प्राचार्यों को पूर्व में ही निर्देश दिए जा चुके थे।
रणमत सिंह,डीईओ, उमरिया