
Disapproving of food items
उमरिया. जिले में खाद्य सामग्रियों से संबंधित लगभग 2 हजार दुकानों में से करीब 700 दुकाने ऐसी हैं, जिनका पंजीयन व रजिस्ट्रेशन अभी तक नहीं कराया गया है। होटलों व चौपाटियों में गंदगी भरी नजर आती है। ज्ञातव्य है कि शासन के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुछ महीनो पूर्व दुकानों में संपर्क कर ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण सेवा देने शर्तनामा का कलेण्डर भी टंगवाया था, लेकिन दूकानों से वह कलेण्डर भी लापता है। ज्ञातव्य हो कि जन स्वास्थ्य रक्षा की दृष्टि से शासन द्वारा दुकानों में स्वच्छता बरतने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने कड़े निर्देश भले ही दिए गए हों, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की ढिलाई से आज भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।
ग्राहकों के स्वास्थ्य रक्षा के लिए शासन द्वारा जारी कलेण्डरों में 11 बिन्दुओं का उल्लेख किया गया था। जिसमें दुकानदार द्वारा साफ सफाई रखने और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना था। इनमें से होटलों व दूकानों की नियमित सफाई। खाद्य सामग्री को ढांक कर रखना। पानी टंंकियों की नियमित सफाई, स्वच्छ स्थल से छने हुए पानी की सप्लाई, खाने पीने के सामान से बीमार नौकर को दूर रखना। सामग्रियों को खराब होने से बचाने केे लिए फ्रिज अथवा कोल्ड स्टोरेज का उपयोग किया जाना। डिब्बों की विधिवत तौल होना, पैकेट पर उत्पादन तिथि, एक्सपायरी और कीमत का स्पष्ट ब्यौरा होना अनिवार्य बतलाया गया था, लेकिन होटलों व रेस्टारेंट व किराना दुकानों में यह कलेण्डर अब दिखाई नहीं पड़ते।
चौपाटी व होटलों में मनमानी
नगर पालिका कार्यालय के पीछे स्थित चाट, फुल्की के ठेलों की चौपाटी में दो दर्जन से अधिक दुकानें संचालित होती हैं। यहां दोपहर बाद से रात दस बजे तक लोगों की जमकर भीड़ लगती है। ठेलों के आसपास दोने जूठन फेंके जाते हैं। सामान खुला रखा रहता है, जिसमें मक्खियां भिनकती रहतीं हैं। पीने का पानी एक ऐसी टंकी से लाया जाता है, जो महीनों से साफ नहीं कराई गई है और आसपास मलबा जमा है।
इस स्थल से दुर्गंध आताी है। इसी टंकी का पानी चौपाटी के दुकानदार ग्राहकों को देते हैं। यहां कुछ महीने पूर्व विभागीय अमले ने दुकानों की जांच कर समझाइस दी थी, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। यही स्थिति नाश्ते व भोजन के होटलों में भी है। पानी देने वाले नौकरों के हाथ गंदे रहते हैं। बर्तनों की ढंग से सफाई नहीं की जाती है। बर्तन धोने के लिए एक टब में वाशिंग पाउडर घोल दिया जाता है, उसी में सारा दिन जूठन डुबोकर धोया जाती है। जबकि यह मानक के विरुद्ध है।
बिना पंजीयन चल रहीं दुकानें
गांव कस्बों में संचालित सैकड़ों दूकानेें ऐसी हैं जिनका न पंजीयन है और न लायसेंस है। दूकानदार खाद्य सामग्रियां बेच रहे हैं। इन दूकानों की न तो सूची बनाई जा रही है और न कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। जबकि आजकल सारी प्रक्रिया सरलीकृत कर ऑनलाइन कर दी गई है।
इनका कहना है
बीते जनवरी माह में 35 दुकानों से सामानों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। वहीं दूकानों की समय-समय पर जांच की जाती है और सामानों के नमूने लिए जाते हैं। होटल मालिकों और चौपाटी वालों को लगातार समझाइश दी जाती है। शीघ्र ही इनके विरुद्ध कड़े कदम उठाए जाएंगे।
अभिषेक गौर, निरीक्षक, खाद्य, सुरक्षा एवं औषधि विभाग, उमरिया
Published on:
19 Feb 2018, 5:51 PM IST
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