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15 रोजगार सहायक बर्खास्त सचिवों पर अनुशात्मक कार्रवाई

मझखेता में हेराफेरी की जांच अधर में

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Disciplinary action on 15 assistant assistant dismissed secretaries

Disciplinary action on 15 assistant assistant dismissed secretaries

उमरिया. जिले के करकेली जनपद अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों के 15 रोजगार सहायकों की सेवा समाप्त कर दी गयी है, साथ ही सचिवों के विरुद्ध अनुशात्मक कार्रवाई के आदेश वरिष्ठ कार्यालय को भेजे गये हैं।
जानकारी के मुताबिक असंगठित क्षेत्र के पंजीकृत श्रमिकों के सत्यापन कार्य को लेकर जिले के कलेक्टर ने सभी जनपदो को निर्देश देते हुये कहा था कि यथा शीध्र कार्य पूर्ण करें, लेकिन जनपद पंचायत करकेली में 93 हजार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीयन के बावजूद 2 हजार 33 श्रमिकों का ही सत्यापन कराया जा सका है। जिसके लिये सीधे तौर पर रोजगार सहायक एवं सचिवों को जिम्मेदार मानते हुये कार्रवाई की गयी है।
बताया गया कि श्रमिकों के पंजीयन एवं सत्यापन का कार्य प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं देख रहे हैं और इसकी प्रगति की लगातार समीक्षा भी कर रहे हैं।
इ-दक्षता केन्द्र में हो रहा सत्यापन
असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीयन उपरांत सत्यापन कार्य में ग्राम पंचायतों में इंटरनेट एवं कम्प्यूटर की असुविधा को देखते हुये कलेक्टर माल सिंह ने आदेश दिया है कि जहां भी असुविधा हो वहां के सचिव, रोजगार सहायक, जिला पंचायत के इ-दक्षता सेन्टर में मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल कर सत्यापन कार्य शीघ्र पूर्ण करें।
उमरिया. जिले मे एक तरफ खुलेआम सरकार को अंधेरे में रख काली कमाई का सफेद खेल खेला जा रहा है। वहीं हेराफेरी की जांच करने वाले अधिकारी ही ऐसे मामलो को दबाने पीछे नही है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमे सरपंच, सचिव के कारनामो की लिखित शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। बताया जा रहा कि मानपुर निवासी राजू गुप्ता ने पंचायत में हो रहे गोलमाल कि शिकायत की गई थी, बाबजूद इसके जांच टीम बनने तक ही पूरी कार्रवाई सिमट कर रह गई। बताया गया है कि मानपुर सीईओ से की गई शिकायत पर सीईओ ने एक टीम गठित कर आरईएस के इंजीनियर प्रवीण सोनी के अलावा अन्य अधिकारी को पंचायत मे हुए भ्रष्टाचार की जांच करने के आदेश दिए थे, लेकिन पंचायत की जांच तो दूर किसी ने उस तरफ मुड कर भी नही देखा है। बताया गया है कि इंजीनियर प्रवीण सोनी की कार्य ्रप्रणाली को लेकर कई बार प्रदेश सरकार के मंत्रियों द्वारा जिला प्रशासन को मुंह की खानी पड़ी है।