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ध्वस्त हैं शौचालय तो कैसे होगा ओडीएफ

2018 के अंत तक जिले को करना है ओडीएफ

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Dismantled the toilet how will Odif

उमरिया. जिले की 224 ग्राम पंचायतों में इन दिनों जिले के मुखिया का फरमान बड़ी तेजी के साथ प्रशासनिक पटरी पर दौड़ रहा है। जिसके पीछे का तर्क हैं कि जिले को वर्ष 2018 के अंत तक ओडीएफ कराना है जो एक चुनौती भरा काम है, लेकिन जिला प्रशासन की यह पहल उस समय बेकार साबित हो रही है। जब पंचायतों में बने शौचालय गिर चुके हैं या उनमें ग्रामीण अपने उपयोग की सामग्री रखकर उसका उपयोग करते देखे जा रहे हैं। प्रशासन की पहल तो सराहनीय है, लेकिन बिना शौचालय के सीटी बजी तो फिर कैसे आएगी स्वच्छता कैसे होगा जिला ओडीएफ। पंचायत में बीते वर्षों के दौरान बनने वाले शौचालयो की स्थिति दयनीय है जिसके कारण लोग उसका उपयोग शौच हेतु न कर अपनी लकड़ी कंडे वाली अलमारी बना रखी है। बताया जा रहा है कि पंचायत के जिम्मेदारों ने शौचालय के नाम पर करोड़ों रूपए हजम करते हुए शासन और प्रशासन को जमकर चूना लगाया है। वही पंचायत सूत्रो का कहना है कि हर हितग्राही के घर में बनाया जाने वाला शौचालय बेकार और घटिया स्तर की सामग्री की खरीददारी कर शौचालय निर्माण मे उपयोग की गई। जिसके कारण अब लोग उस शौचालय को छोड़ बाहरी खेतों और खुले में शौच करने मजबूर हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि नगर पालिका परिषद के अधिकांश वार्ड मे ही शौचालय नही है और हैं भी तो आधे अधूरे। जिससे आज भी खुले में शौच करने लोग मजबूर है।

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अधूरे बने हैं सुविधा घर
घुनघुटी. क्षेत्र के आसपास ग्राम पंचायत औडेणा व मनिया गुड़ा और घुनघुटी जैसे ग्राम पंचायतों में शौचालय की काफी सामने समस्याएं दिखाई दे रही है। बताया गया है कि ग्राम पंचायत औडेणा और घुनघुटी कला में बीते वर्ष 456 शौचालय में से महज 310 शौचालय ही काम लायक हैं। बांकी शौचालय सिर्फ दिखावा मात्र बनकर रह गए हैं। इस प्रकार घुनघुटी में शौचालय बनाने की लक्ष्य को अभी भी पूरा नहीं किया गया। वहीं बने कई शौचालयों के कहीं का गेट अधूरा तू कहीं गड्ढे अधूरे पड़े हैं। इसी प्रकार ग्राम पंचायत मालियगुणा में भी शौचालय की समस्याएं सामने आई है। बताया गया है कि कुछ शौचालय ठेकेदारों द्वारा बनाया गया है और कुछ हितग्राहियों द्वारा बनाया गया। जो बरसात में ध्वस्त हो सकते हैं और उन्हे दोबारा कैसे सुधारा जाएगा, यह विचारणीय प्रश्न है।