
खेती को लाभ का धंधा बनाने सरकार की मंशा हो रही फेल
उमरिया। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने से लेकर खेती को लाभ का धंधा बनाने सरकार की मंशा जिले में फेल होती दिख रही है। खेती के लिए आधुनिक पद्धति से अवगत कराने खेत की पाठशाला जिले में लुप्त हो चुकी है। विभाग की निष्क्रियता के चलते इस महत्वपूर्ण योजना का किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। एक दशक पूर्व कृषि विभाग द्वारा पुराने लक्ष्य के आधार पर खेत पाठशाला अमल में लाई गई थी। निर्धारित प्रारूप के अनुसार खरीफ और रबि की दोनो फसलों में प्रति विकासखण्ड के 3 गांवों में 3 पाठशालाएं आयोजित की जानी हैं। इसमें किसी गांव की एक हेक्टयर भूमि में पंजीकृत 25 किसानों को खाद, बीज, बोनी, उपकरणों आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन्ही पाठशालाओं में खेती के कीट व्याधियों की जानकारी भी ली जाती है। साथ ही कृषि विभाग को प्रस्तुत की जाती है। प्रत्येक पाठशाला 6 सत्रों में संचालित किए जाने का प्रावधान है। इसलिए शासन द्वारा प्रति सत्र 10 हजार रुपए का व्यय खर्च भी दिया जाता है। बावजूद इसके दोनो फसलों में पाठशालाएं आयोजित करने की बजाय किसी एक ही फसल में औपचारिकता कर कोरमपूर्ति की जा रही है। जिले में योजना के तहत प्रति विकासखण्ड 3 पाठशाला और 25 किसानों के मान से कुल 9 खेत पाठशाला और 75 किसान शामिल होने चाहिए। वहीं कुल 3 विकासखण्ड और 624 गांव के उमरिया जिले में 1 लाख 45 हजार किसान पंजीकृत हैं। रबी फसल का रकबा 65.66 हजार हेक्टयर है। न तो बाद में कभी लक्ष्य बढ़ाया गया और न कार्यक्रम का ढंग से संचालन किया जा रहा है।
किसान अनभिज्ञ
जिले में अभी तक समुन्नत खेती से अधिकांश किसान अनभिज्ञ हैं और यहां छिटवां खेती ही की जाती है। जिसमें किसान अपने खेतों में छीट कर बीज बोता है। जबकि सरकार द्वारा धान की श्रीपद्धति, अरहर की धारवाड़ पद्धतियों जैसी उन्नत खेती का प्रचार प्रसार कर रही है और इन पद्धतियों को अधिकतम किसानों तक ले जाने के प्रयास में है। जिले में न तो किसानों को प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था की जाती है और न पर्याप्त जागरुकता शिविर लगाए जाते हैं।खेती के नए उपकरणों को दूर दराज गांवों के किसान अभी तक देख भी नहीं पाए हैं।
किसान मित्रों की संख्या भी कम
किसानों की समस्याओं का निराकरण कराने और योजनाओं की जानकारी देने ग्राम सभा के अनुमोदन से किसान मित्र नियुक्त किए जाते हैं। इनकी संख्या दो गांवों में 1 के मान से निर्धारित की जाती है। बताया गया कि 624 गांवो में अभी तक कुल ढाई सौ किसान मित्र ही नियुक्त किए गए हैं। ऐसे में जिले में किसान मित्रों की संख्या भी कम है। जिनका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
प्रत्येक ब्लाक में 15 प्रशिक्षणों की जरूरत
किसानों तक खेत पाठशालाओं की पहुंच बढ़ाने और उन्हे इससे जोडऩे के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक विकासखण्ड में प्रति सीजन 15 पाठशालाओं का आयोजन हो जिनके 6 सत्र हों। किसानों को खेती से संबंधित सारी जानकारियों की व्यवस्था हो। अभी प्रशिक्षण का कार्य कुल 1 हेक्टयर में दिया जाता है। इसका भी रकबा बढ़ाया जाए। पाठशालाओं की जानकारी पूर्व से किसानों को दी जानी चाहिए। ज्ञातव्य है कि इन्ही पाठशालाओं के माध्यम से किसान प्रशिक्षण लेकर किसान मित्रों से सहयोग ले सकता है। अधिकारी तथा वैज्ञानिक किसानों की स्थिति के अनुसार रिपोर्ट तैयार कर विभाग को सौंपते हैं और फिर उस अनुरूप उपाय किये जाते हैं। सही ढंग से प्रशिक्षण दिया जाए तो उससे किसान लाभान्वित होंगे।
इनका कहना है
खेत पाठशालाओं का आयोजन शासन के निर्धारित लक्ष्य के अनुसार किया जा रहा है। यह प्रयास किया जाता है कि इनके सभी सत्रों का संचालन हो।
राजेश प्रजापति, उप संचालक कृषि
पाठशालाओं में एक बड़ी कमी यह भी है कि जिस फसल की पाठशाला होगी केवल उसी की जानकारी दी जाती है। यदि किसान खेती से संबंधित कोई अन्य जानकारी चाहे तो उसे वहां जानकारी नहीं मिल पाती है। 25 से अधिक किसान उसमें बुलाए भी नहीं जाते हैं।
दयाराम राठौर, किसान, अखड़ार।
Published on:
19 May 2019 01:12 pm
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