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हर मनोकामना पूरी करती हैं मां बिरासिनी

10वीं शताब्दी की कलचुरी कालीन महिसासुर मर्दिनी का विराट स्वरूप

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Maa birasini fulfills every wish

Maa birasini fulfills every wish

उमरिया/बिरसिहपुर पाली. शारदीय नवरात्र पर्व के दौरान बिरसिहपुर पाली में बिराजी आदिशक्ति स्वरुपा माँ बिरासिनी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। आज नवरात्र की बैठकी मनाई जा रही है जिसकी घट स्थापना और पूजा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाकर नवरात्र के कलश स्थापना का शुभारंभ किया गया।
नवरात्र पर्व के पहले दिन देश-विदेश के कोने कोने से श्रद्धालुजन माता के दर्शन पाने पहुचे और मां को प्रसन्न करने के लिए भोग प्रसाद चढाया। मानता रखने वालों ने अपने नौनिहालो का मुडन, कर्णछेदन कराया साथ ही जवारा कलशों की स्थापना की। उल्लेखनीय है कि 10वीं शताब्दी की कलचुरी कालीन महिसासुर मर्दिनी विराट स्वरूप में स्थापित माता बिरासिनी देवी मंदिर उमरिया के बिरसिहपुर पाली में है जहां वर्ष में दो बार शारदेय व चैत्र नवरात्र में धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है जिसमें प्रतिवर्ष हजारों घी तेल व जवारा कलसों की स्थापना की जाती है।
माता के दर्शनार्थ भारत के कोने कोने से श्रद्धालूजन यहां आते है और अपनी मनोकामना की पूर्ति करते है। माता बिरासिनी देवी मंदिर में हरिहर भगवान जो आधा शिव जी, आधा विष्णु जी की मूर्ति भी स्थापित है। वहीं राधा कृष्ण, मरही माता, शनिदेव, हनुमान जी का मंदिर दर्शनार्थियों के लिए अलौकिक केन्द्र है। बताया जाता है कि माता बिरासिनी मंदिर अति प्राचीन हैं माँ ने सैकडो वर्ष पूर्व पाली निवासी धौकल पंडा को स्वप्न दिए कि में एक खेत में हूू तुम आकर मुझे ले जाओ और मेरी प्रतिमा नगर के बीचों बीच स्थापित करो तब धौकल पंडा ने ऐसा ही किया। पूर्व में माँ को एक पेड के नीचे मडुलिया बनाकर बिराजमान कराया गया, फिर एक मंदिर का निर्माण नगर के राजा बीर सिंह ने कराकर इन्हें स्थापित किया।
बीते 10-15 वर्ष पूर्व एसईसीएल जोहिला एरिया के प्रबंधक ललित मोहन तिवारी ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की सहमति से स्वेच्छा दान लेकर लाखेंा रूपये की लागत से संगमरमर निर्मित मंदिर का निर्माण कराया जिसका लोकार्पण संत स्वारूपानन्द सरास्वती जी महराज के कर कमलों में किया गया। यहां की अलौकिक शक्ति ? से लोगों का अपार भीड़ आती है व मनोवांछित फल की प्राप्ति करने वाले चढ़ावा भी चढ़ाते हैं।
लाखों का चढ़ावा
बताया जाता है कि माता बिरासिनी के दरबार में एक वर्ष के दौरान 14 से पन्द्रह लाख रूपये नगद चढावा आता है वही सोने-चांदी के जेवरात सहित अन्य सामाग्री शामिल रहते है। भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने पर कई श्रद्धालुजन गुप्त दान भी करते है।
कलश स्थापना
माता बिरासिनी के दरबार में इस बार श्रद्धालुओ के लिए घी जवारे कलश 750 रुपये, तेल जवारे कलश 400 रुपये, मनोकामना कलश 50 रुपये, आजीवन घी जवारे कलश 15,000 रुपये, आजीवन तेल जवारे कलश 8100 रुपये प्राप्त कर स्थापित कराये जा रहे है।
प्रशासन की देखरेख
गौरतलब है कि पूर्व में इस मंदिर का संचालन स्थानीय लोगो के द्वारा एक समिति बनाकर किया जाता था लेकिन बीते 4- 5 साल से मंदिर की व्यवस्था व संचालन जिला प्रषासन के द्वारा किया जा रहा है जिसमें जिले के कलेक्टर इसके संरक्षक पदेन एसडीएम अध्यक्ष, तहसीलदार सचिव व विभाग प्रमुख सदस्य होते है।