
Now women will prepare items with bamboo utensils
उमरिया. स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओ को संगठित कर जिला प्रशासन द्वारा आजीविका मिशन से प्रशिक्षण दिलाकर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से स्वावलंबन की पहल प्रारंभ की गई है। महिलाएं आत्मनिर्भर हो सके, अपने हाथों में हुनर के माध्यम से घर की जीविकोपार्जन में सहभागी। स्व सहायता समूहों के बकेली तथा उजान ग्रामों की 12 महिलाओं का प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को बांस शिल्प का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में इन्हें घरेलू उपयोग के साथ ही आकर्षण साज सज्जा की चीजों के निर्माण की बारीकियां सिखाई गईं। प्रशिक्षण का आयोजन एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण केन्द्र उमरिया द्वारा किया गया। ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्व सहायता समूहों से जुडी महिलाओं को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण देकर उनकी आय बढ़ानें की दिशा में सतत रूप से प्रयास किए जा रहे है। जिला प्रशासन की पहल पर परंपरागत रूप से बसोर जाति की महिलाओं को कम लागत पर अधिक कीमत पर बिकने वाली सामग्री नाईट लैम्प, मंदिर, सजावट की वस्तुएं , मछली, फ्लावर पाट, गुलदस्ता, ट्रे, अंगूठी, कंगन आदि के निर्माण में ये महिलाएं पारंगत हो चुकी है। स्व सहायता समूह से जुडी हुई ग्राम उमरिया बकेली निवासी इंदा बाई बेन ने बताया कि वे परंपरागत रूप से गांव मे उपयोग की जाने वाली बांस से निर्मित वस्तुएं टोकनी, सूपा, दौरी, पंखे आदि का निर्माण कर जीविकोपार्जन करती आ रही है। इन कार्यो में बांस अधिक लगता था, किंतु लाभ बहुत कम मिल पाता था। स्व सहायता समूह से जुडने के बाद आजीविका मिशन के माध्यम से प्रशिक्षण की जानकारी मिली। आजीविका मिशन की दीदी कामना त्रिपाठी ने बताया कि कम लागत एवं कम मेहनत से ज्यादा कीमती बांस की वस्तुएं तैयार की जा सकती है, जिनकी बाजार में काफी मांग है। उनके द्वारा तैयार सामग्री के विक्रय के लिए बांधवगढ टाईगर रिजर्व में अरण्यक पार्क में दुकान भी उपलब्ध करा दी जाएगी। जिसमें मानपुर जनपद पंचायत की इन महिलाओ को बिरसिंहपुर पाली निवासी मास्टर ट्रेनर प्रीतम बसोर जिन्होंने वर्ष 1993 में मध्यप्रदेश हस्त शिल्प विकास निगम मर्यादित भोपाल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद नाईट लैम्प, मंदिर, फ्लावर पाक, गुलदस्ता, ट्रे, रिंग, कंगन आदि बनाकर बांधवगढ स्थित विभिन्न रिसोर्टो में सामग्री का विक्रय किया जा रहा है।
के द्वारा यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाओं द्वारा प्रशिक्षण में रूचि ली गई। परंपरागत रूप से बांस से निर्मित वस्तुओं का निर्माण करने के कारण ये महिलाएं सहजता से कलात्मक वस्तुएं तैयार करनें के गुर सीख गई है।
Published on:
21 Dec 2020 06:30 pm
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