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अतिकुपोषित बच्चों को अधिकारियों ने लिया गोद

एनआरसी में भर्ती 205 अतिकुपोषित बच्चे

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Obituary children adopted by the authorities

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उमरिया. कुपोषण समाज के लिये कलंक है। कुपोषण के कई कारण हो सकते है, जिसमें स्वच्छता का अभाव, खान-पान में कैलोरी की कमी, मॉ का कमजोर होना या जल्दी-जल्दी प्रसव होना आदि है। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जिले में भी जिला प्रशासन द्वारा अभियान चलाकर 205 अतिकुपोषित बच्चों को चिन्हांकित किया गया है। इन बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराकर जहां चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है वहीं उनके अभिभावकों को बच्चों की देखरेख का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। 21 दिन के बाद बच्चें के स्वास्थ्य में सुधार के बाद निर्धारित वजन पूरा कर लेने पर उनकी एनआरसी से छुट्टी की जाती है। इसके बाद शुरू होता है बच्चों का अनुसांगिक मानीटरिंग। कलेक्टर माल सिंह जब दौरे में जाते है तो कुपोषित बच्चों की सूची उनके साथ होती है। वे चौपाल में इस सूची को पढकर सुनाते हैं तथा ग्रामीणों के समक्ष अभिभावकों से चर्चा भी करते है। आवश्यकतानुसार मौके पर ही चिकित्सकों के माध्यम से उन बच्चों का स्वास्थ परीक्षण भी कराते है। गत दिवस आकाशकोट क्षेत्र के धवईझर ग्राम में आयोजित चौपाल के दौरान कलेक्टर ने कुपोषित बच्चों एवं उनके परिवार जनों से मुलाकात की तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी एवं उनके साथ गये पैरामेडिकल दन के माध्यम से स्वास्थ परीक्षण कराकर आवश्यक दवाईयॉ भी उपलब्ध कराई। कलेक्टर ने मौके पर ही ग्राम नोडल अधिकारी तथा पंचायत प्रतिनिधियों को अतिकुपोषित बच्चों को गोद लेकर समान्य श्रेणी में लाने की समझाईश दी जिस पर सभी ने अपनी सहमति जताई।
योजना से रवि कुमार की बदली तकदीर
उमरिया. नगरपालिका अंतर्गत वार्ड नं.11 के रवि कुमार पटेल ने ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी की तलाश मे भटकते रहे, अचानक उनके दिमाग में यह बात आई कि क्यों न मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत इसका लाभ लिया जाए। महज एक माह के अंदर स्थानीय बैंक आफ बड़ौदा में प्रकरण भेजकर रवि कुमार पटेल को किराने की दुकान हेतु एक लाख रूपये का ऋण स्वीकृत कर तीन किस्तों में राशि भी प्रदाय कर दी गई है। रवि कुमार ने महज 6 माह में अपने मासिक किस्त की अदायगी के साथ साथ घर का पूरा खर्च, दो बच्चोंं की पढ़ाई के अलावा 7-8 हजार रूपये मासिक बचत भी कर रहा है। दुकान पूरी तरह से सामग्रियों से भरी हुई है। सुबह 8 बजे से सायं 9 बजे तक लगभग 4-5 हजार की बिक्री करने के बाद प्रति दिन जो भी सामग्री दुकान में कम होती जाती है या ग्राहकों की नये नये सामग्री की डिमाण्ड पर थोक की दुकान से 10 बजे रात्रि तक दुकान को लवलेश करता रहता है।