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पद्मश्री जोधइया बाई को नाती ने दी मुखाग्नि, अंतिम यात्रा में शामिल हुए जनप्रतिनिधि और अधिकारी

पंचतत्व में विलीन हुईं पद्मश्री जोधइया बाई

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पंचतत्व में विलीन हुईं पद्मश्री जोधइया बाई

पंचतत्व में विलीन हुईं पद्मश्री जोधइया बाई

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित जोधइया बाई बैगा (86) का रविवार को शाम 5 बजे निधन हो गया था। उनकी अन्त्येष्टि सोमवार को उनके गृह ग्राम लोढ़ा में हिंदू रीति रिवाज से हुई। पूर्व सांसद शहडोल संसदीय क्षेत्र ज्ञान सिंह, कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू, सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह, अपर कलेक्टर शिवगोविंद सिंह मरकाम, एसडीएम बांधवगढ़ रीता डेहरिया, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस नागेन्द्र प्रताप सिंह, जोधइया बाई के गुरु स्व. आशीष स्वाामी के परिजनों ने उनके निज निवास में पहुंचकर पुष्प चक्र अर्पित किया तथा शव यात्रा में शमिल होकर कंधा भी दिया।
मुखाग्नि नाती अमर बैगा ने दी। जिला प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान, विधायक बांधवगढ़ शिवनारायण सिंह, विधायक मानपुर मीना सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सुप्रसिद्ध बैगा चित्रकार पद्मश्री जोधइया बाई का निधन दुखद है।
उन्होंने दिवंगत की पुण्यात्मा को शांति प्रदान करने और परिजनों व प्रशंसकों को दुख सहन करने की प्रार्थना की है। उनके सम्मान में संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर में कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन की अगुवाई में जिला प्रशासन द्वारा शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।
संघर्ष की मिसाल रहीं हैं जोधइया बाई
जोधइया बाई का जीवन संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण की मिसाल है। शिक्षा से वंचित होते हुए भी उन्होंने अपने अद्भुत हुनर से बैगा जनजाति की चित्रकला को देश और दुनिया में एक नई पहचान दिलाई। कला जगत में उनका योगदान अद्वितीय था। उन्होंने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पद्मश्री सम्मान और राष्ट्रीय नारी शक्ति सम्मान प्राप्त कर उन्होंने मध्यप्रदेश और देश को गौरवान्वित किया। 60 साल की उम्र में ब्रश पकडऩे की शुरुआत करने वाली जोधइया बाई ने महज 20 साल में कमाल कर दिखाया। जोधइया बाई बैगा के हाथों से उकेरे गए चित्र आज दुनिया के मशहूर चित्रकार लियोनार्दो द विंची के देश इटली में रंग बिखेर रहे हंै। जोधइया बाई के चित्रों की धाक ऐसी कि मिलान शहर में आयोजित इस प्रदर्शनी के आमंत्रण पत्र का कवर पेज भी जोधइया बाई की पेंटिंग से रंगा हुआ था।