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पहले बनाती थीं टोकनी और सूपा, अब बना रहीं लैंप, रिंग और कंगन

बांधवगढ़ पर्यटकों के लिए बांस से तैयार कलात्मक वस्तुओं को उतारने की तैयारी

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Previously used to make baskets and soups, now making lamps, rings and bracelets

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उमरिया. प्रदेश सरकार की आत्म निर्भर मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने हेतु ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्व सहायता समूहों से जुडी महिलाओं को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण देकर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में सतत रूप से प्रयास किए जा रहे है। जिला प्रशासन की पहल पर परंपरागत रूप से बसोर जाति की महिलाओं को कम लागत पर अधिक कीमत पर बिकने वाली सामग्री नाईट लैम्प, मंदिर, सजावट की वस्तुएं , मछली, फ्लावर पाट , गुलदस्ता, ट्रे, अंगूठी, कंगन आदि के निर्माण का 13 दिवसीय आवासी प्रशिक्षण भारतीय स्टेट बैंक उमरिया द्वारा संचालित ग्रामीण रोजगार प्रशिक्षण संस्थान में दिया जा रहा है। स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई ग्राम उमरिया बकेली निवासी इंदा बाई बेन ने बताया कि वे परंपरागत रूप से गांव मे उपयोग की जाने वाली बांस से निर्मित वस्तुएं टोकनी, सूपा, दौरी, पंखे आदि का निर्माण कर जीविकोपार्जन करती आ रही है। इन कार्यो में बांस अधिक लगता था, किंतु लाभ बहुत कम मिल पाता था। स्व सहायता समूह से जुडऩे के बाद आजीविका मिशन के माध्यम से प्रशिक्षण की जानकारी मिली। आजीविका मिशन की दीदी कामना त्रिपाठी ने बताया कि कम लागत एवं कम मेहनत से ज्यादा कीमती बांस की वस्तुएं तैयार की जा सकती है, जिनकी बाजार में काफी मांग है। अगर महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहे तो आजीविका मिशन के माध्यम से निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। उनके द्वारा तैयार सामग्री के विक्रय हेतु विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ टाईगर रिजर्व में अरण्यक पार्क में दुकान भी उपलब्ध करा दी जाएगी। महिलाओं ने कौशल उन्नयन प्रशिक्षण प्राप्त करनें की मंशा जाहिर की। जिसमें मानपुर जनपद पंचायत की विभिन्न स्व सहायता समूहों के बकेली तथा उजान ग्रामों की 17 महिलाओं का प्रशिक्षण हेतु चयन किया गया। इन महिलाओ को बिरसिंहपुर पाली निवासी मास्टर ट्रेनर प्रीतम बसोर जिन्होंने वर्ष 1993 में मध्यप्रदेश हस्त शिल्प विकास निगम मर्यादित भोपाल से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद नाईट लैम्प, मंदिर, फ्लावर पाक, गुलदस्ता, ट्रे, रिंग, कंगन आदि बनाकर बांधवगढ स्थित विभिन्न रिसोर्टो में सामग्री का विक्रय किया जा रहा है, के द्वारा यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आरसेटी के संचालक एम एल एल्काना ने बताया कि समूह की महिलाओं को यह 13 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण निशुल्क है। महिलाओं द्वारा प्रशिक्षण में रूचि ली जा रही है। परंपरागत रूप से बांस से निर्मित वस्तुओं का निर्माण करने के कारण ये महिलाएं सहजता से कलात्मक वस्तुएं तैयार करनें के गुर सीख रही है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अंशुल गुप्ता ने बताया कि स्व सहायता समूह की महिलाएं लगातार कौशल उन्नयन कर आत्म निर्भरता की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन उनके सहयोग के लिए तत्पर है।