उमरिया. शहर में लगातार जिला प्रशासन द्वारा राजस्व भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। सालों से काबिज कब्जे को हटाकर शहर को सुंदर और व्यवस्थित किया जा रहा है। बावजूद इसके शासन की मंशा के विपरीत शहर की लाईफ लाईन कही जाने वाली उमरार नदी अतिक्रमणकारियों के निशाने पर है। खासकर झिरिया मोहल्ला, कैम्प व करबला के इलाके में नदी किनारे बेजा कब्जे किए जाने के एक दो नहीं बल्की पूरी बस्ती उदाहरण है। इतना ही नहीं खुलेआम नदीं को बांधकर अतिक्रमण कराने के साथ ही दूषित किए जाने का भी खेल चल रहा है। उमरार नदी पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण के कारण नदी का अस्तित्व खतरे में है। झिरिया मुहल्ला व कैम्प में नदी से लगे इलाके में पहले बस्ती का गंदा पानी नालों के माध्यम से बहता था। वहीं नदी के दूसरे तट यानि खलेशर की ओर लगभग आधा सैकड़ा अवैध सुरंगे हैं। इनमे दशकों से गरीब मजदूर कोयला खोदकर अपना जीवन यापन करते थे। देखते ही देखते कुछ सफेदपोशों के इशारों में अब यहां झोपड़ीनुमा मकानों में बस्ती तन चुकी है। नजूल व रेलवे भूमि पर अतिक्रमण सुनियोजित तरीके से किया गया है। अतिक्रमणकारियों ने तो नदी पार करने नालों में आवागमन के लिए पुल भी बनवा दिए हैं।