
सुंदर की आंखों को आज भी साथी के लौट आने की आस
उमरिया. मानव हो या वन्यजीव, अपने हित-अनहित की जानकारी रखते है। वन्य प्राणियों को अपने हितैषी के प्रति संवेदनशीलता भी रहती है, और वे उसके अनुसार व्यवहार भी करते हैं। मानव एवं वन्य प्राणी के बीच दोस्ती तथा प्रेम की परंपरा आदिकाल से रही है। इसके अनगिनत किस्से हंै। जिन्हें कई बार चित्रो के माध्यम से भी देखने को मिलता है। वन्य प्राणी हाथी सुंदर एवं उसकी देखरेख करने वाले महावत रवि बैगा के बीच अनमोल रिश्तों की है। 3 अक्टूबर को जब बाधंवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया में दोपहर का भोजन देते समय गलती से हाथी के पैर के नीचे आ जाने से महावत रवि बैगा की मौत हो गई थी। हाथी सुंदर को अपनी इस गलती का दुख है। हाथी सुंदर की आंखों में अपने 12 साल के हमदर्द साथी रवि बैगा के मृत्यु का गम झलकता है। वह महावत की मृत्यु से गमगीन है। यही कारण है कि इस घटना के बाद से उसकी गतिविधियों में फर्क का अंदाजा सहज ही अनुभव किया जा सकता है। दूसरे महावत सखाराम ने बताया कि 32 वर्षीय हाथी सुंदर आज कल चारा पत्ती भी नही खाता है। बडी मुश्किल से भोजन देने पर जीवन संचालन भर के लिए भोजन करता है, जो भी उसे भोजन पहुंचाने जाता है वह उसकी तरफ टकटकी लगाकर देखता है तथा अपने प्रिय साथी महावत रवि बैगा को तलाशता है । पार्क में अपने दायित्व के निर्वहन के बाद वह अपने लिए नियत जगह में जाकर खड़ा हो जाता है। भोजन चुपचाप करके वह अपनी जगह में लौट जाता है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में सुंदर नामक इस हाथी के साथ 18 हाथियों का कुनबा है। वर्तमान में सुंदर हाथी मादा हाथी तूफान के साथ खितौली कोर एरिया में गस्त की जिम्मेदारी संभाल रहा है। प्रतिदिन दिन में दो बार जंगल के निर्धारित रूट में देख रेख करने जाता है। टाईगर ट्रैकिंग, पग मार्क एवं शावको की सुरक्षा में महावत इन हाथियों की मदद से नजर रखते है। हाथी सुंदर एवं महावत रवि बैगा की खास दोस्ती थी। इन दोनो पर वन्य जीवों पर अधारित फिल्म भी बनाई जा चुकी है। हाल ही में एक संस्था द्वारा बाघों की सुरक्षा के लिए वन रक्षक की कार्यप्रणाली पर अधारित डाक्यूमेंन्ट्री फिल्म मे ंभी इन्हें दिखाया गया है। जिसमें महावत एवं हाथी की मदमस्त ंचाल दिखाई गई है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत खितौली परिक्षेत्र में कुंभी कछार हाथी कैम्प में टाइगर रिजर्व के हाथी सुंदर गज द्वारा महावत का कार्य करने वाले स्थायीकर्मी रवि प्रताप बैगा को दुर्घटनावश कुचल दिया गया। जिसके फलस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई थी। उल्लेखनीय है कि प्रात: प्रतिदिन की भांति रवि प्रताप बैगा द्वारा सुंदरगज को कसकर गश्ती की गई एवं लोटने के उपरांत हौदा इत्यादि खोलकर रखे जाने के दौरान हाथी कैम्प के श्रमिक इंद्रपाल सिंह पर हाथी द्वारा आक्रमण किया गया। जिसे देखकर रवि प्रताप बैगा दौड़कर सामने आ गया एवं श्रमिक को बचा लिया था। पुन: जब श्रमिक हाथी के पैर में कड़ी बांधने हेतु जा रहा था, हाथी द्वारा उसको धक्का दिया गया एवं जंगल की ओर भागने के दौरान सूंड से टकराकर रवि गिर गया एवं दुर्घटनावश हाथी का पांव उसके चेहरे पर पड़ा जिसके कारण सिर कुचलने के चलते स्थल पर ही उसकी मृत्यु हो गई थी।
Published on:
08 Nov 2019 08:30 am
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