
संस्कृत बोलने मात्र से शरीर रहता है स्वस्थ, अनुस्वार और विसर्ग के उपयोग से ही हो जाती हैं प्राणायम की क्रियाएं
इंदौर. शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, रामबाग में 15 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का आयोजन प्राचार्य अरुणा कुसमाकर के निर्देशन में किया गया। शिविर के प्रभारी डॉ. अभिषेक पांडेय थे। प्रशिक्षक मुकेश ओझा और आदर्श पांडे ने शिविर में आने वालों को संस्कृत का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया। शिविर में 7 से 65 की उम्र तक के लोगों ने हिस्सा लिया। 50 से अधिक लोगों ने 15 दिनों तक लगातार संस्कृत की प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की और सरल संस्कृत में बात करना सीखा। शिविर का समापन गुरुवार को हुआ। इस दौरान दूसरी कक्षा के छात्र नभ द्विवेदी ने संस्कृत में अपना परिचय दिया और अनुभव सुनाया। शिविर में आकर्षक का केंद्र रहा यह 7 वर्षीय बालक समापन कार्यक्रम में भी अतिथियों का चहेता बन गया। प्राचार्य ने उसे कई उपहार देकर प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने स्वच्छता पर लघु नाटक भी प्रस्तुत किया। शिविर के बाद विद्यार्थियों ने कहा कि संस्कृत सीखने के बाद भारत की पुरातन संस्कृति के प्रति उनका प्रेम और बढ़ गया है।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. अरुणा कुसुमाकर, डॉ. वन्दना नाफड़े, डॉ गोपालकृष्ण शर्मा, डॉ लज्जा शुक्ला तथा डॉ अभिषेक पाण्डेय उपस्थित रहे। डॉ. अभिषेक पाण्डेय ने बताया, संस्कृत भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके बोलने मात्र से शरीर स्वस्थ रहता है। अनुस्वार और विसर्ग के उपयोग से ही प्राणायम की क्रियाएं हो जाती हैं।
शिविर के अंत में परीक्षा भी आयोजित की गई और समापन कार्यक्रम में इसमें हिस्सा लेने वालों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। परीक्षा में प्रथम स्थान अनुज पाण्डेय और विक्की गौड़, द्वितीय स्थान अलका और प्रतिष्ठा तथा तृतीय स्थान अभिषेक मालवीय ने प्राप्त किया। प्रतिष्ठा, विक्की तथा दुर्गा पुरोहित को सबसे अच्छा प्रदर्शन करने पर विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया।
Published on:
18 Jan 2020 12:46 am
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