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अवैध तरीके से वन्य जीवों की ट्रॉफियां रखने के आरोपी अश्विन शर्मा की अग्रिम जमानत खारिज

दो दिन चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

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भोपाल

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Sunil Mishra

Jul 06, 2020

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भोपाल। राजधानी के माता मंदिर स्थित प्लेटिनम प्लाजा निवासी अश्विन शर्मा के यहां आईटी के छापे में घर से बरामद हुई वन्य जीवों की ट्राफियां जांच में अवैध निकली। वन विभाग ने अश्विन द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। गिरफ्तारी के डर से अश्विन शर्मा ने भोपाल सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया था। अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश एसबी साहू के न्यायालय में दो दिन चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुएआरोपी का अग्रिम जमानत का आवेदन निरस्त कर दिया।
कोर्ट में वन विभाग की ओर से सुधाविजय सिंह भदौरिया ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल 2019 को आयकर विभाग की टीम ने प्लेटिनम प्लाजा निवासी अश्विन शर्मा के फ्लैट न. बी 67 में रेड की थी। मौके से 10 करोड़ रुपए से ज्यादा नगद जब्त करने के साथ ट्राफियां (वन्य प्राणियों की खाल) मिली थी। जिनमें -टाइगर के मुंह की एक ट्रॉफी , सांभर के मुंह की सींग सहित एक ट्रॉफी , सांभर सींग की दो ट्रॉफी , चिंकारा सींग की एक ट्रॉफी एवं चीतल की एक पूरी एक खाल ( कुल 06नग ) मिली थी । जब्त की गई ट्राफियों को भोपाल उडऩ दस्ता को सौंपा गया था। इस मामले में भोपाल वन मंडल को अश्विन शर्मा की ओर से दस्तावेज सौंपे गए थे। लगभग ग्यारह माह तक चली जांच के बाद मार्च 2020 में वे सभी दस्तावेज फर्जी निकले। इसके बाद वन विभाग ने अश्विन शर्मा को अपने बयान दर्ज कराने एसडीओ वन विभाग के कार्यालय में उपस्थित होने का आदेश दिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए अश्विन ने अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया था। संचालक लोक अभियोजन पुरूषोत्तम शर्मा ने अश्विन शर्मा की अग्रिम जमानत खारिज कराने के लिए सुधा विजय सिंह भदौरिया को बधाई दी और उन्हें अलग से प्रशस्ति पत्र देने की बात कही।

गुना जिले में नहीं मिला रिकार्ड

अश्विन शर्मा ने अपने पिता स्वर्गीय सीएच शर्मा के नाम से 12 मार्च 1973 को ट्राफियों के पंजीयन के लिए दिया गया घोषणा पत्र सौंपा था। जिसमें जागीरदार का पता कुम्भराज जिला गुना का लिखा हुआ था। और यह घोषणा पत्र मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक भोपाल को पेश करना बताया गया था। वन विभाग ने जब इन दस्तावेजों की जांच की तो न तो इनका पंजीयन विभाग में होना पाया गया और न ही उसके स्थानांतरण से जुड़े कोई दस्तावेज मिले थे।