
मरीना बीच पर काणुम पोंगल का लुत्फ
चेन्नई. पोंगल के अंतिम और चौथे दिन को काणुम कहते हैं। काणुम पोंगल की मान्यता है कि लोग इस दिन अपने घरों से बाहर रहतेे हैं। लोग घरों से निकलकर किसी पर्यटन स्थल या समुद्र तटों और पर्यटन स्थलों का रुख करते हैं। काणुम पोंगल के तहत राज्य के लोग सपरिवार घर से निकले और तफरीह की। राज्य में यह एक परम्परा बन गई है जब पूरा परिवार पर्यटन पर निकलता है।
विश्व के दूसरे सबसे बड़े समुद्रतट मरीना पर पांव रखने की जगह नहीं थी। हालांकि पुलिस का कहना था कि पिछले साल की तुलना में इस बार पर्यटक कम आए है। इसकी एक वजह कई लोगों का पैतृक शहरों से वापस नहीं लौटना है। बच्चे, महिलाएं और बूढ़े सभी काणुम पोंगल मनाने सोल्लास पहुंचे। वहां नट का तमाशा दिखाने वालों को भी दर्शक मिले तो झूला झुलाने वालों को बड़ी संख्या में ग्राहक। फुटपाथी ग्राहकों की भी चांदी कटी।
गिण्डी नेशनल चिल्ड्रन पार्क में उमड़ी भीड़
पोंगल के दिन घरों में बने स्वादिष्ट व्यंजन के साथ उनका सफर शुरू होता है। पर्यटन स्थलों पर खेलादि मनोरंजन के बाद वे शाम को घर लौटते हैं। गिण्डी नेशनल चिल्ड्रन पार्क में भी कुछ ऐसा ही नजारा था। नेशनल पार्क में भी सपरिवार आए लोगों ने पूरा लुत्फ लिया। यहां टिकट बिक्री काउंटर पर दिनभर लोगों की भीड़ नजर आई। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
Published on:
17 Jan 2020 07:39 pm
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