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डॉ. धीरेन्द्र बोले, भीलवाड़ा टेक्सटाइल कॉलेज देश में जमाएगा धाक

माणिक्य लाल वर्मा राजकीय टेक्सटाइल एवं इंजीनियिरिंग इंस्टीट्यूट (कॉलेज) अब रोजगार की गारंटी देगा, इसके लिए कॉलेज देश के साथ ही विदेशी कॉलेज के विशेषज्ञों की ऑन लाइन सेवा लेगा। प्राचार्य डॉ.धीरेन्द्र शर्मा ने पत्रिका से यह बात कही।

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Dr. Dhirendra said, Bhilwara Textile College will accumulate in the country

Dr. Dhirendra said, Bhilwara Textile College will accumulate in the country

भीलवाड़ा। माणिक्य लाल वर्मा राजकीय टेक्सटाइल एवं इंजीनियिरिंग इंस्टीट्यूट (कॉलेज) अब रोजगार की गारंटी देगा, इसके लिए कॉलेज देश के साथ ही विदेशी कॉलेज के विशेषज्ञों की ऑन लाइन सेवा लेगा। स्थानीय टेक्स्टाइल इकाईयों में पास आउट विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर मिलें, इसके लिए स्थानीय के साथ ही देश की जानी मानी औद्योगिक इकाईयों के साथ एमओयू किया जा रहा है। इतना ही नहीं प्रत्येक विद्यार्थियों को कॉलेज अपने स्तर पर ही कम्प्यूटर देगा। जबकि कॉलेज की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और शहर की जनता को समारोह स्थल की सुविधा मिलें, इसके लिए पीपी मोड पर कॉलेज का ऑडिटोरियम आम जन के लिए खोला जाएगा। प्राचार्य डॉ.धीरेन्द्र शर्मा ने पत्रिका से यह बात कही।

उन्होंने चर्चा के दौरान बताया कि कोरोना काल में जिस प्रकार से हालात बने है उनसे निपटने के लिए कॉलेज के ही पूर्व छात्र अब भामाशाह बनने लगे है।

सवाल: गत चार साल में कॉलेज में प्रवेश का ग्राफ नीचे आया है, क्या कारण
जवाब: इंजीनियरिंग में रूझान कम हुआ है, लेकिन इस बार जो रुझान आ रहे है, वो उत्साह जनक है। हमारी कोशिश यही रहेगी की कॉलेज के विद्यार्थियों के पास आउट होते ही उनका जिले में प्लेसमेंट हो जाए। नए प्रवेश रीप कोटा के जरिए ही ऑन लाइन होंगे। इस बार सरकार १२ वीं के अंक के आधार पर ही प्रवेश संभव होगा।

सवाल: प्लसमेंट की किस प्रकार की योजना है
जवाब: स्थानीय टेक्सटाइल इकाईयों में कॉलेज के पास आउट विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर मिले, इसके लिए भीलवाड़ा व देश की बड़ी टेक्सटाइल यूनिट के साथ एमआेयू की कार्ययोजना बनाई है।

सवाल: एमओयू हुआ या नहीं
जवाब: योजना पर काम शुरू हो गया है, भीलवाड़ा की पांच टेक्सटाइल उद्योग के साथ एमओयू हुआ है, जबकि दस बड़ी औद्योगिक इकाईयों के साथ बातचीत हो रही है। इनमें कई पास आउट छात्रों को एमओयू के कारण नौकरी मिली है।

सवाल: कोविड १९ का असर आया क्या
जवाब: कोविड काल में प्रवेश को लेकर चुनौती रहेगी, लेकिन प्रबंधन ने जो कार्ययोजना बनाई है वो असरकारक साबित होगी। हालांकि देश के विभिन्न हिस्सों के बजाए भीलवाड़ा जिले के आसपास के जिलों से प्रवेश बढऩे की अच्छी संभावना है।

सवाल: विदेशी कॉलेज व विशेषज्ञों से मदद लेंगे क्या
जवाब: विदेशों में टेक्सटाइल एवं डेटा सांइस इमरेजिंग कॉलेज से संबधिक विदेशी कॉलेजेज की मदद ले रहे है। इसमें दी टेक्सटाइल एसोसियेशन ऑफ इंडिया मुख्य भूमिका निभा रहा है। एसोसियेशन का मैं मानद सचिव होने से व्यक्तिगत स्तर पर भीलवाड़ा कॉलेज को पूरा फायदा मिलें, एेसे हर संभव प्रयास किए जा रहे है। इसके कुल सदस्य २५ हजार है। राजस्थान की टाई यूनिट में ७०० सदस्य है, इसके अध्यक्ष उद्योगपति आर एल नौलखा है

सवाल: कौन-कौन से विदेशी कॉलेज है
जवाब: चेक गणराज्य का प्रतिष्ठित कॉलेज टेक्नीकिनल यूनिवसर्सिटी ऑफ चेक रिपब्लिक है, यहां टेक्सटाइल का पाठयक्रम है। कॉलेज के विशेषज्ञ ऑन लाइन क्लासेज लेंगे। इसी प्रकार यूएस की यूएन स्टेट ऑफ यूनिवसर्सिटी के साथ बातचीत हो रही है।

सवाल: विदेशी मदद क्यूं
जवाब: कॉलेज में वरिष्ठ प्रोफेसरों की कमी नहीं है, विभिन्न पाठ्यक्रम है, लेकिन विदेशी तकनीक व देश में हो रहे बदलाव का ज्ञान भी जरूरी है।सवाल: ऑडिटोरियम की क्या, राह खुलेगी
जवाब: टेक्सटाइल कॉलेज में सीमिति संसाधन है, एेसे में सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रस्ताव सरकार को भिजवाए है, कॉलेज परिसर में करीब दस करोड़ की लागत से निर्मित ऑडिटोरियम भवन का उपयोग नहीं हो रहा है। इसका जीर्णोद्धार कराते हुए इससे पीपी मोड पर संचालित करवाया जाएगा। कई कम्प्यूटर खराब है, इन्हें ठीक कराते हुए प्रत्येक विद्यार्थी को होस्टल में मुहैय्या कराया जाएगा। ताकि छात्र संस्थान समय के अलावा उन कम्प्यूटर का उपयोग छात्रावास में कर सकेंगे।

सवाल: पूर्व छात्र क्या भामशाह की भूमिका निभा रहे है
जवाब: कई पूर्व छात्रों ने कॉलेज की मदद के लिए हाथ बढ़ाए है। इनमें दीपक आमेटा जो कि अभी उद्योगपति है, उन्होंने एचवीआई हाईवल्यूम टेस्टिंग इंस्टूमेंंट जिसकी लागत एक करोड़ है, वो कॉलेज को मुफ्त में दी है। इसी प्रकार नाहर स्पिनिंग ने भी एयरजेट मशीन प्रदान की है। ये मशीन हालांकि पुरानी है, लेकिन कॉलेज के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए बड़ी जरूरत थी। इंजीनियंरिंग एवं मेकेनिकल विद्यार्थियों के लिए भी अधिक सुविधा मिल सके

सवाल: पूर्व छात्रों से किस प्रकार समन्वय किया जा रहा है
जवाब: देश एवं विदेश में कॉलेज के कई पूर्व छात्र इंजीनियर व उद्योगपति समेत उच्च पदों पर कार्यरत है, यह भी कॉलेज के लिए बहुत कुछ करने के लिए जज्बा रखते है, एेसे पूर्व विद्यार्थियों से ऑन लाइन मीट भी शुरू की है ताकि देश एवं विदेश में टेक्सटाइल एवं विदेश में हो रहे बदलाव को हम जान सकें और सीख सके

सवाल: कितने पाठयक्रम संचालित है
जवाब: संस्थान में अभी पांच पाठयक्रम टेक्सटाइल एवं इंजीनियिरिंग में संचालित है। इनमेंं करीब चार सौ विद्यार्थी जुड़े है। बेहतर प्रशिक्षण मिल सकें, इसके लिए पांच करोड़ की लागत की नई मशीनें खरीदी गई है और कुछ जल्द खरीद ली जाएगी। देश के विभिन्न हिस्सों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है। अभी चार छात्रावास है, एक छात्रावास केवल छात्राओं के लिए है।