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एमपी-यूपी का वन अमला मिलकर करेगा बाघों की हिफाजत

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मारकुंडी में हुई बैठक, दोनों राज्यों के अधिकारियों में बनी सहमति

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वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मारकुंडी में हुई बैठक

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए मारकुंडी में हुई बैठक

सतना. मारकुंडी से मझगवां रेलवे स्टेशन के मध्य वन क्षेत्र से गुजरे रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए गुरुवार को सतना एवं चित्रकूट वन मंडल के अधिकारियों के बीच अंतरराज्यीय बैठक हुई। मारकुंडी स्थित वन विभाग के रेस्टहाउस में दोनों राज्यों के अधिकारियों ने बाघों की सुरक्षा के लिए साझा प्रयास पर जोर दिया। दोनों राज्यों के वन अमले की गश्त और रेलवे के अलर्ट के बावजूद रेललाइन में ट्रेनों की चपेट में आकर वन्यजीवों की मौत पर गंभीरता से विचार किया गया। अधिकारियों ने माना कि दोनों राज्यों के वन अमले के बीच तालमेल की कमी के कारण समय पर वन्यजीवों के मूवमेंट की जानकारी नहीं मिलती। इस कारण वन्य जीव ट्रेनों की चपेट में आ रहे हैं।

बैठक में दोनों राज्यों के अफ सरों ने समन्वय पर जोर दिया। वन्यजीवों की हिफ ाजत के लिए दोनों राज्यों के अफ सरों ने एक-दूसरे से सहयोग मांगा, साथ ही एक साझा कार्यक्रम तैयार किया। इसके तहत अब बाघों का मूवमेंट यूपी से एमपी के वन क्षेत्र में होने पर वन्य अधिकारी तुरंत इसकी सूचना एक-दूसरे को देंगे। इससे समय पर उनकी सुरक्षा के उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

बाघों की शरणस्थली बने तराई के जंगल

सतना डीएफ ओ राजीव मिश्रा ने कहा कि यूपी-एमपी सीमा से सटे दोनों जंगल बाघों का स्थायी निवास बन चुके हैं। दोनों राज्यों के जंगलों में बाघों का मूवमेंट बड़ी तेजी से हो रहा। बाघ इस पूरे तराई के जंगल में विचरण कर रहे हैं। बैठक में सूचनाओं के आदान-प्रदान और क्या-क्या साझा प्रयास कर सकते हैं, इस पर भी चर्चा हुई।

भोपाल में अटका चेन लिंक का प्रस्ताव
हावड़ा-मुम्बई रेल लाइन में इटवां डुड़ैला से चितहरा तक ट्रैक के दोनों ओर घना जंगल है। इसमें वन्यजीवों की मूवमेंट बनी रहती है। कई बार वन्यजीव ट्रैक पार करते हुए हादसे का शिकार हो जाते हैं। इतना ही नहीं ट्रैक पर काम करने वाले रेल कर्मचारी भी वन्यजीवों के निशाने पर रहते हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए वन मंडल सतना के अधिकारियों ने मझगवां वन क्षेत्र में ट्र्रैक के दोनों ओर 9 फ ीट ऊंपी बाड़ लगाने का ढाई करोड़ का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है लेकिन वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित चैन लिंक पर शासन स्तर पर अमल नहीं हो पाया।