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शिवपुरी. एक आदिवासी महिला के नाम पर भारतीय जनता पार्टी ने 1 लाख 76 हजार रुपए की न केवल बिजली की खपत कर दी, बल्कि अभी भी उसका उपयोग कर रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के नाम से आवंटित कोठी नंबर-एक में पूर्व जिपं अध्यक्ष जूली आदिवासी के नाम से बिजली का मीटर लगा है तथा उस पर बकाया राशि अभी भी जूली के नाम से ही दर्शाई जा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने के बावजूद इस भवन को प्रशासन भाजपा से खाली नहीं करवा पा रहा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2005 में जूली आदिवासी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं थीं, तथा वो जब कोठी नंबर-एक में निवास करती थीं, तभी से बिजली का मीटर जूली आदिवाासी के नाम से ही लगा हुआ है। जूली आदिवासी के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष बने जितेंद्र जैन के नाम से यह कोठी आवंटित हुई, लेकिन बिजली का बिल जूली के नाम से ही चलता रहा। जितेंद्र जैन के हटने के बाद से इस कोठी में भाजपा का जिला कार्यालय संचालित होने के साथ ही बिजली का उपयोग भी किया जा रहा है और बिल जूली के नाम से चल रहा है।
ज्ञात रहे कि जूली आदिवासी तो महज एक मोहरा थीं, जबकि उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में पूर्व कांग्रेसी नेता व वर्तमान में भाजपा से कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने पूरा दमखम लगाया था। उस दौरान जूली सिर्फ रबर स्टांप की तरह अध्यक्ष रहीं, इसीलिए अध्यक्ष पद से हटने के बाद जूली वापस अपने गांव में मजदूरी करने लगीं। इतना ही नहीं पिछले दिनों पत्रिका ने ही जूली आदिवासी की बदहाल आर्थिक स्थिति की खबर जब प्रकाशित की थी, तब आनन-फानन में प्रशासन ने जूली के लिए कुटीर स्वीकृत की थी। इन हालातों में रहने वाली पूर्वजिला पंचायत अध्यक्ष जूली आदिवासी कोठी नंबर-एक का बिजली बिल 1 लाख 76 हजार रुपए का बिल आखिरकार वो कैसे अदा कर सकेंगी।
प्रशासन नहीं खाली करवा पा रहा कोठी
कोठी नंबर-एक वर्तमान में किसी के नाम आवंटित नहीं है तथा गुना-शिवपुरी सांसद डॉ. केपी यादव का आवेदन कोठी लेने के लिए लगा हुआ है, जिस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ। चर्चा तो यह भी है कि कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद भाजपा सांसद के आवेदन का इतना दबाव प्रशासन पर है कि वो इस कोठी को भाजपा से खाली नहीं करवा पा रहा।
अब यह देखना पड़ेगा कि मीटर पदनाम से है या फिर अध्यक्ष के नाम से। यदि बिल अभी भी पूर्व अध्यक्ष के नाम से आ रहा है तो जो जितने समय तक उसमें रहा, उतना बिल उससे वसूल किया जाएगा। उस समय में अधिकारियों ने इतनी बिल राशि कैसे बकाया होने दी, हम पता करवाते हैं।
पीआर पाराशर, महाप्रबंधक विविकं
Published on:
17 Jan 2020 03:42 pm
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