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दादा गुरुदेव व नाकोड़ा भैरव की वेदी पर विराजी प्रतिमाएं

सरवाड़ में प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान उमड़ा पोरवाल जैन समाज, नगाड़ा-शहनाई, बैण्डबाजा, मंत्रों की गूंज व जयकारों के साथ वेदी पर प्रतिमाएं प्रति िष्ठत हुई

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Viraji statues on the altar of Dada Gurudev and Nakoda Bhairav

दादा गुरुदेव व नाकोड़ा भैरव की वेदी पर विराजी प्रतिमाएं,दादा गुरुदेव व नाकोड़ा भैरव की वेदी पर विराजी प्रतिमाएं

अजमेर. उपखंड मुख्यालय सरवाड़ स्थित दादाबाड़ी परिसर में भजन,मंगल गीतों की स्वरलहरियां की गूंज और मंत्रोच्चारण के बीच दादा गुरुदेव की प्रतिमा,उनके चरण, नाकोड़ा भैरव व अन्य प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा धूमधाम से संपन्न हुई।

गुरुवार को द्वार के उद्घाटन के साथ ही समारोह का समापन हो गया। इससे पूर्व सत्तरभेदी पूजा व दादा गुरुदेव की पूजा हुी। बुधवार को प्रन्यास प्रवर विनयकुशल मुनि व नंदीषेण मुनि तथा साध्वी शुभदर्शना श्रीजी के सान्निध्य में प्रतिमा प्रतिष्ठा महोत्सव हुआ।

बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं की उल्लासमयी उपस्थिति और मनोज भाई बाबूमल हरण के निर्देशन में प्रतिष्ठित प्रतिमाओं की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने दादाबाड़ी में विराजमान प्रतिमाओं के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

बही भजन सरिता

जीर्णोद्धारित दादाबाड़ी के प्रतिष्ठा महोत्सव में परिसर जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान भजन प्रस्तुत किए गए। भजन गायकों ने मेरे मन में पारसनाथ, तेरे मन में पारसनाथ, नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्र्शन होगा, जिसकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा तथा जब कोई नहीं आता-मेरे दादा आते हैं आदि भजनों से श्रदधालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

प्रभु की छवि मन में बसाएं

धर्मसभा में विनय कुशल मुनि ने कहा कि मन-मंदिर में प्रभु को प्रतिष्ठित करने पर ही जीवन की सार्थकता है। जो अपने भीतर में वीतराग प्रभु को बसा लेता है, उसी का जीवन कल्याण के पथ पर अग्रसर होता है। साध्वी शुभदर्शना श्रीजी ने कहा कि नित्य परमात्मा की पूजा हो, समाज में भाईचारा बढ़े और धर्म व भक्ति के वातावरण का निर्माण हो तथा सत्य व अहिेंसा की पताका सदैव फ हराती रहे, इसकी महत्ती आवश्यकता है। मनोज भाई ने कायमी सामूहिक ध्वजा सहित विभिन्न बोलियां लगाई, जिन्हें अधिकतम राशि समर्पण करने वालों के नाम अंकित की गई।

सहयोग करने वालों का सम्मान

कार्यक्रम में संघ की ओर से विभिन्न लाभार्थियों ताराचंद, लाभचंद धूपिया, विजय कुमार कक्कड़, गणपत सिंह आंचलिया, हितेन्द्र कुमार महता, तेजसिंह पानगडिय़ा, देवीसिंह महता, राजेश कुमार चौधरी, आयुष कक्कड़, लालचंद लोढ़ा, निहालचंद मेड़तवाल, कुशलचंद मुणोत, महावीर चंद खींचा, सूरजकरण महता व खरतरगच्छ संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रिखबचंद झाड़चूर आदि का अध्यक्ष विमलचंद कक्कड़, मंत्री संजय कुमार पगारिया आदि ने श्रीफ ल भेंटकर बहुमान किया। कार्यक्रम में लादूलाल सोनी, तेजसिंह पानगडिय़ा, रामदेव पोखरना, लोकेश चौधरी, प्रेमचंद मुहणोत, सुरेन्द्र कुॅवाड़, राजेश कक्कड़, जसवंत सोनी, चैनसिंह पगारिया, ज्ञानचंद मोदी, गुमान पालेचा, नरेन्द्र लोढ़ा, धर्मेन्द्र बरडिय़ा, सुरेन्द्र लोढ़ा आदि मौजूद रहे। समारोह में माहेश्वरी समाज की ओर से अध्यक्ष लक्ष्मीनिवास डोडिया, मंत्री लक्ष्मीकांत लढ़ा आदि ने समाज के पदाधिकारियों का शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया।

प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन

सरवाड़ में जीर्णोद्धारित दादाबाड़ी का चार दिवसीय प्रतिष्ठा समारोह का समापन गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और आस्था से सराबोर वातावरण, भगवान आदिनाथ और दादा गुरुदेव के गूंजते जयकारों के संग हुआ। प्रन्यास प्रवर विनय कुशल मुनि, नंदीषेण महाराज व साध्वी शुभदर्शना श्रीजी की प्रेरक उपस्थिति में प्रतिमाओं के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया।

गुरवार प्रात: मुनि प्रवर ने सकल संघ के साथ यहां सूरजकरण, महेन्द्र कुमार महता के निवास पर पदरावणी की और ढोल-बाजों के साथ महता परिवार के परिजन को साथ लेकर दादाबाड़ी पंहुचे। महता परिवार की ओर से सूरजकरण महता व महेन्द्र कुमार महता तथा उनके परिजनं ने जयकारों के बीच विधि-विधान पूर्वक दादाबाड़ी के मुख्य द्वार पर लगा चांदी का ताला खोलकर द्वार का उद्घाटन किया।

बहुमान : मंदिर में द्वार उद्घाटन के लाभार्थी सूरजकरण व महेन्द्र कुमार महता का अध्यक्ष विमलचंद कक्कड़ व दादाबाड़ी समिति के विजय कक्कड़ ने बहुमान किया। इस दौरान संघ मंत्री संजय कुमार पगारिया, रामदेव पोखरना, सुरेन्द्र सिंह महता, संपत सिंह आंचलिया, हितेन्द्र महता, गौरव पानगडिय़ा, श्रेयांस चौरडिय़ा, सुरेन्द्र सोनी, रिखबचंद आंचलिया, दिलीप गोखरू, अमित लोढ़ा, हितेन्द्र पगारिया, बिरदीचंद जैन, अमित डोडिया आदि मौजूद रहे।