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आशा ज्योति केंद्र की सुगमकर्ता भटकती महिलाओं के लिये बनी आशा की किरन

आशा ज्योति केंद्र की सुगमकर्ता भटकती महिलाओं के लिये बनी आशा की किरन

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unnao

asha jyoti

उन्नाव. उम्र 80 साल की वृद्ध महिला का घर से निकल कर किसी मदद से दूसरे जिले पहुंचना और भटकते रहना, वह भी जीवन के अंतिम पड़ाव में काफी कष्ट दायक होता है। जितना उस वृद्धा के लिये नहीं होगा उससे अधिक संवेदनशील समाज के लिये होता है। ऐसे में कारगर हुयी 181 ने वृद्धा को अल्पवाश पहुंचाया। इसके बाद भी वृद्ध महिला अपने विषय में कोई जानकारी नहीं दे पा रही थी।

वृद्ध महिला का बैग खंगालने पर उसमें ज्वैलरर्स का पता मिला। जिस पर लिखे फोन नम्बर से सम्पर्क किया गया। फिर क्या था महिला पहुंच गयी अपनों के बीच। परंतु इस बीच वृद्ध महिला ने आशा ज्योति केंद्र की सुगम कर्ता की काफी परीक्षा ली और उसे नये अनुभव से अवगत कराया। इस सम्बंध में बाल सरंक्षणा अधिकारी ने बताया कि इस प्रकार के मामलों में काफी सर्तकता से कदम उठाने की जरूरत होती है। जिसे अंजाम देने के लिये आशा ज्योति केंद्र की सुगमकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।

बाल सरंक्षण अधिकारी ने सुगमकर्ताओं के कार्यों की प्रशंसा की

बाल सरंक्षण अधिकारी संजय मिश्रा ने आशा ज्योति केंद्र द्वारा कि गये रेसक्यू के सम्बंध में बताया कि विगत रविवार को जिलाधिकारी कार्यालय के पास एक वृद्ध महिला बैठी थी। जिसकी जानकारी उन्हे 181 के माध्यम से मिली। उन्होंने तत्काल वृद्ध महिला से बातचीत की। काफी प्रयासों के बाद वृद्ध महिला से मिली जानकारी के आधार पर उनके घर में बच्चों को जानकारी दी गयी। पता चला कि वृद्धा को पेंशन मिलती और घर में बच्चे काफी ध्यान रखते है।

परंतु किसी बात को लेकर नाराज हुयी वृद्धा अपने घर से निकल आयी थी। जिसके बाद से वह इधर-उधर भटक रही थी। इसी प्रकार के एक और प्रकरण का जिक्र करते हुये संजय मिश्रा ने बताया कि 181 के माध्यम से ही एक महिला मिली। जिसे अल्पवाश में रखा गया। परंतु उसके विषय में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। महिला बार बार कह रही थी कि गेट खोलो उसे जाना है। परंतु वृद्ध महिला कुछ बता नहीं पा रही थी। इस पर उनके झोले की धीरे से तलाशी ली गयी। जिसमें एक ज्वेलर्स का मोबाइल नम्बर मिला। जो गैर जनपद का था।

उससे बातचीत करने पर उसने बताया कि यह महिला हमारे पड़ोस की है। यहां घर वाले बहुत परेशान है। सूचना मिलने पर वृद्ध महिला के बच्चे आये और उसे साथ चलने के लिये कहा। परंतु महिला नहीं मान रही थी। इस पर सुगमकर्ता आयूषी सिंह और रंजना श्रीवास्तव ने काफी समझाने का प्रयास किया। इस वृद्ध महिला तैयार तो हुयी परंतु सुगम कर्ता से कहने लगी कि तुम भी हमारे साथ चलो। सुगम कर्ता द्वारा वृद्ध महिला की बात रखने के लिये हां कहने पर वह अपने बेटे के साथ गयी।