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डाक्टरों को भरोसा नहीं है सरकारी अस्पताल के जांच रिपोर्ट पर
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डाक्टरों को भरोसा नहीं है सरकारी अस्पताल के जांच रिपोर्ट पर

दवाईयों के साथ जांच भी बाहर से लिखते है डाक्टर, एमआर से मिले उपहारों की पूरी कीमत अदा करते है डाक्टर

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उन्नाव. जिला अंस्पताल के डाक्टरों द्वारा बाहर से जांच कराने का का मामला उस जिलाधिकारी के सामने आया जब वह निरीक्षण करने के लिये जिला अस्पताल पहुंचे। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि डाक्टर यदि बाहर से जांच लिखते है तो इसकी जांच करायी जायेगी। दोषी पाये जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी। वहीं उमाशंकर संयुक्त जिला चिकित्सालय में महिला और पोषण पुनर्वास केंद्र के कर्मचारी उस समय बांहे समेटने लगे जब कमरे में कब्जे को लेकर विवाद शुरू हुआ। महिला अस्पताल के कर्मियों ने स्टोर में रखा कम्प्यूटर और अन्य कीमती समान फेंकना शुरू कर दिया। इस बीच विवाद जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचा। जहां उन्होने दोनो पक्षों से बातचीत की और निर्णय सुनाया कि विवादों में आया कमरा पोषण पुनर्वास केंद्र के पास रहेगा। महिला विभाग को कमरा खाली करना पडे़गा।

 

जिलाधिकारी ने दिया जांच का आदेश

जिला अस्पताल का विवादों से पुराना नाता है। जहां के डाक्टर प्रशासन पर हावी है। उनकी मनमानी के आगे स्वास्थ्य विभाग के सक्षम अधिकारी भी बौने साबित हो रहे है। कैमरे के आगे कोई बोलनें को तैयार नहीं है। परंतु स्थिति दिन प्रति दिन बद से बदतर होती जा रही है। कहने के लिये शासन द्वारा यहां पर तमाम सुविधायें मरीजों को दी जा रही है। परंतु जिला अस्पताल की जांच कर विभागीय डाक्टर ही विश्वास नहीं कर रहे है। जिलाधिकारी देवेन्द्र कुमार पाण्डेय के औचक निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया। उन्होने जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की बात कही है। परंतु अभी भी डाक्टर बाहर से जांच ही नहीं दवाईयां भी लिख रहे है। एमआर से घिरे रहने वाले डाक्टर उनके द्वारा दिये जाने वाले उपहारों के की कीमत मरीजों को बाहर से दवा लिखकर चुकाते है। अब देखना है कि जिलाधिकारी की जांच में क्या सामने आता है।

 

स्टोर का निर्णय किया जिलाधिकारी ने

जिला महिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र का भी संचालन हो रहा है। जिसके स्टोर रूम में कब्जे को लेकर महिला अस्पताल और पोषण पुनर्वास केंद्र के कर्मी आमने सामने आ गये। महिला अस्पताल के कर्मी स्टोर में रखा कम्प्यूटर और अभिलेखों को बाहर फेंक दिया। जिसके बाद मामला तूल पकड़ा। जिसका निर्णय जिलाधिकारी ने किया। उन्होने स्टोर का कब्जा पोषण पुनर्वास केंद्र को देने का निर्देश दिया।