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18 फरवरी 2018 कि सुबह 5 बजे श्रीकांत ने मदनलाल को फोन पर बताया कि तुम्हारी बेटी सोनी जल कर मर गई है। यह सुनते ही घर में कोहराम मच गया था। जिसकी शादी 11 मई 2011 को विकास सोनी निवासी जवाहर नगर सदर कोतवाली उन्नाव के साथ हुई थी। इस संबंध में निर्मल सोनी पुत्र मदनलाल ने थाना में तहरीर देकर विकास सोनी मीना श्रीकांत और गोल्डी और प्रियंका के खिलाफ तहरीर देकर बताया था कि दहेज के लिए सभी लोग उनकी बेटी को प्रताड़ित करते हैं। तहरीर मिलने पर सदर कोतवाली पुलिस ने आईपीसी की धारा 498 A, 304B और 3/4 दहेज एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया था।
मामला न्यायाधीश अपर जिला एवं सत्र न्यायालय अदालत में चल रहा था। न्यायधीश एहसान उल्लाह खान मामले की सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुनाया। जिसमें सभी नामजद अभियुक्तों के खिलाफ दोष सिद्ध किया गया। पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सबकी परिवार के अन्य सदस्यों को भी विभिन्न धाराओं में दर्ज मुकदमे पर अलग-अलग सजा सुनाई है। यह सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजक एडीजीसी क्रिमिनल विनय शंकर दीक्षित में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके पूर्व परिवार न्यायालय में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका था।
अधिवक्ता विनय दीक्षित ने बताया
अभियोजन की ओर से वकील सरकार एडीजीसी क्रिमिनल विनय दीक्षित 'आशु' के तर्कों व दलीलों तथा तथ्यों पर आधारित बहस से सहमत होकर न्यायाधीश एहसान उल्लाह खान ने अभियुक्त पति विकास सोनी को धारा 304B के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। जबकि 498A के अंतर्गत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया। धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत 2 वर्ष के सश्रम कारावास व 5 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया।
मां और बहन को बराबर का दोषी पाया गया
न्यायालय ने अभियुक्तगण विकास सोनी की मां मीना और बहन गोल्डी उर्फ़ प्रियंका को आईपीसी की धारा 394B के अंतर्गत 10-10 वर्ष की सजा सुनाई गई। इसी के साथ आईपीसी की धारा 498A के अंतर्गत 3-3 वर्ष के कारावास व दस-दस हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्ड लगाया है। आईपीसी की धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 5-5 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। उन्होंने बताया कि इनमें से अभियुक्त श्रीकांत की मृत्यु हो चुकी है।
Published on:
14 May 2022 08:25 am
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