
विशेष न्यायालय पॉक्सो ने वादी के खिलाफ दोष सिद्ध करते हुए सुनाई सजा, जानें पूरा मामला
अदालत ने वादी के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करने को लेकर सख्त कदम उठाया है और वादी को पक्ष द्रोही करार देते हुए न्यायालय में हाजिर करने का आदेश जारी किया। 7 साल पूर्व हुई इस घटना के बाद बीते मंगलवार को एक बार फिर अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया। गैर जमानती वारंट जारी होते ही पुलिस ने कार्रवाई की और वादी को गिरफ्तार कर अदालत में हाजिर किया। जिसे सजा सुनाई गई। यह फाइल तब खुली जब अदालत में चल रहे विचाराधीन मामलों की समीक्षा की गई। तब यह मामला सामने आया। समीक्षा में पाया गया कि सुनवाई के दौरान वादी व गवाह सभी बदल गए हैं। जिसको अदालत ने गंभीरता से लिया और सीआरपीसी 344 के अंतर्गत नोटिस जारी किया गया था।
मामला पूर्वक थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले का है। मोहल्ला वासी खालिद ने 2014 में थाना में तहरीर देकर दलीगढ़ी मोहल्ला निवासी मुन्ना उर्फ मोबिन के खिलाफ दुष्कर्म समय अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई के दौरान वादी और गवाह घटना के संबंध में गवाही देने से मना कर दिया। बोले वह गवाही नहीं देंगे। गवाहों के मुकरने से पॉक्सो अदालत ने गंभीर माना और वादी के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 344 में नोटिस जारी कर दिया। इसकी भनक लगते ही वादी फरार हो गया। 7 साल बाद फाइल सामने आई तो अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया।
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समीक्षा के दौरान खुला मामला
विशेष पॉक्सो न्यायालय में निस्तारण और विचाराधीन मामलों की समीक्षा हो रही थी। इसी दौरान विशेष लोक अभियोजक प्रदीप श्रीवास्तव के सामने यह फाइल आई। जिस पर उन्होंने विशेष न्यायाधीश पॉक्सो संदीप गुप्ता के सामने उक्त मामले अपना पक्ष रखा। मामला सामने आने के बाद न्यायाधीश ने पुरवा कोतवाली को वादी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने और गिरफ्तारी का आदेश दिया। वारंट जारी होते ही पुरवा पुलिस हरकत में आई और गैर जमानती वारंट पर कार्रवाई करते हुए वादी को गिरफ्तार कर अदालत में प्रस्तुत किया। न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए वादी को 10 दिन का कारोबार और सौ रुपए का अर्थ दंड सुनाया।
Published on:
01 Jun 2022 09:57 am
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