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उन्नाव. पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली यूं ही नहीं उठाई जाती है। पीड़ितों द्वारा शिकायती पत्र मिलने पर पुलिस कार्रवाई की जगह समझौता करा कर मामला रफा-दफा करने का प्रयास करती है। जिसका खामियाजा पीड़ितों को उठाना पड़ता है। इसी प्रकार का एक शिकायती पत्र कोतवाली पुरवा में दिया गया। न्याय ना मिलने पर में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को भी दिया गया। पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली प्रभारी को कार्रवाई का आदेश दिया। लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात। पीड़िता ने जग हंसाई और दबंगों की दबंगई से थक कर जहरीला पदार्थ खा अपनी जान दे दी। पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर मृतका के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वही मृतक परिजनों के लिए एक सवालिया निशान छोड़ गया कि पुलिस पीड़ितों के साथ न्याय नहीं करती है।
कोतवाली पुलिस ने कराया था जबरन समझौता
मामला पुरवा कोतवाली क्षेत्र के गांव ऊंचगांव किला का है। उक्त गांव निवासी निशा पुत्री सुंदर लाल ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी। पुलिस मौके पर पहुंची शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। लेकिन इसके पीछे एक लंबी कहानी छोड़ गई। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नेहा पांडे को दिए शिकायती पत्र में निशा पुत्री सुंदरलाल ने अपनी आपबीती सुनाते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। जिस पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नेहा पांडे ने थाना कोतवाली प्रभारी को कार्रवाई करने के लिए लिखा था। परंतु पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और पुलिसिया हथकंडे अपनाते हुए दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। निशा के पिता सुंदर लाल ने बताया कि गांव के ही रहने वाले दिलीप कुमार पुत्र जगन्नाथ से उसके प्रेम संबंध हो गए थे।
एक जाति के होने के बाद ही दिया धोखा
दोनों एक ही जाति के थे। इसलिए बगैर किसी दबाव के आपसी रजामंदी में दोनों ने शादी करने का विचार किया। दोनों जल्द से जल्द शादी करना चाहते थे। इसी बीच विगत चुनाव में दिलीप कुमार ने प्रधानी का चुनाव जीत लिया। उसके बाद से उसने निशा से दूरी बना ली। निशा ने अपने शिकायती पत्र में कहा था कि मैं इस गांव का प्रधान हूं और तुम मेरे लायक नहीं हो। इतने दिनों से जो मैंने तुमको पत्नी का दर्जा दे रखा था। वह तुम्हारी किस्मत थी। परंतु अब तुम मेरी पत्नी बनने लायक नहीं हो। मैं तुमसे शादी नहीं करूंगा। उन्होंने दिलीप के माता-पिता को उन्होंने सारी बातें बताई। जिस पर विगत 30 मई 2017 को दिन में जगन्नाथ और उसकी पत्नी माया घर में घुसकर उसे मारने पीटने लगे।
जैसे उसने समझौता किया वैसे तुम भी कर लो
उन्होंने कहा कि कुछ दिन पूर्व मेरे छोटे बेटे द्वारा गांव की एक लड़की के साथ गलत हरकत की थी। वैसे ही ₹35000 लेकर समझौता कर लिया था। तुम भी समझौता कर लो। इस पर निशा ने कहा मुझे पैसा नहीं पत्नी का दर्जा चाहिए। यह सुनकर सभी मारपीट करने लगे। इस संबंध में निशा ने कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन प्रधानी के दबदबे के कारण पूरी घटना न लिखकर मामला एनसीआर में दर्ज किया गया और उन्हे मौके से भगा दिया गया। इसके बाद निशा ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में कहा था कि यदि पुलिस ने उसके साथ न्याय नहीं किया तो वह अपना जीवन समाप्त कर लेगी। आखिरकार पुलिस ने न्याय नहीं किया और निशा ने अपना जीवन समाप्त कर लिया।
Published on:
5 Mar 2018, 5:33 PM IST
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