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पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
उन्नाव. माता सीता की जब बात चलती है तो श्री राम का उल्लेख स्वत: सामने आ जाता है। लेकिन जानकी कुंड परियर महर्षि वाल्मीकि आश्रम में मैया सीता बिना राम के विराजमान है। जानकी कुंड परियर में विशाल वटवृक्ष, 12 कोसी महारण क्षेत्र धार्मिक पृष्ठभूमि का एहसास कराती है। वह कुंड विस्थापित जहां मैया सीता ने भू समाधि ली थी। 12 महीने यहां भक्तों का मेला लगता है। जानकी जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन किया जाता है। केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा जानकी कुंड परियर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मान्यता है मैया सीता सबकी मनोकामना को पूरी करती हैं।
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मुख्य पुजारी ने दी जानकारी
जानकी कुंड परियर के मुख्य पुजारी पंडित रमाकांत तिवारी के अनुसार महर्षि बाल्मीकि ने मैया सीता को वनवास काल के दौरान यहां आश्रय दिया था। यहीं पर लव और कुश का जन्म हुआ। जानकी कुंड परियर के निकट पावा गांव में लव और कुश ले अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा पकड़ा था। जिसे विशाल बट वृक्ष में बांदा गया था। मान्यता है कि अश्वमेध यज्ञ को छुड़ाने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने जानकी कुंड परियर क्षेत्र में प्रवेश के पूर्व चकलवंशी के निकट भूमि पूजन किया और भूमेश्वर महादेव की स्थापना की।
बल खंडेश्वर महादेव में उमड़ती है भक्तों की भीड़
वहीं दूसरी तरफ श्री राम के बल को कम करने के लिए महर्षि बाल्मीकि ने जानकी कुंड परियर में बल खंडेश्वर महादेव की स्थापना की। दोनों शिवालय जनपद ही नहीं आसपास के लोगों के बीच आस्था का केंद्र है। सावन के महीने में बड़ी संख्या में लोग दर्शनों के लिए आते हैं। कुशहरी देवी मंदिर का जुड़ाव लव और कुश से है कुश नहीं कुशहरी देवी में मैया की स्थापना की थी। जानकी कुंड परियर कानपुर और उन्नाव से सड़क मार्ग से जुड़ा है उन्नाव मुख्यालय से 30 किलोमीटर चकलवंशी होते हुए परिसर पहुंचा जा सकता है जबकि कानपुर से बिठूर होते हुए जानकी कुंड परियर का मार्ग है।
क्या हुआ जब अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को छुड़ाने के लिए पहुंचे श्री राम
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा छोड़े गए अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को लव और कुश ने पकड़ कर वटवृक्ष में बांध दिया था। जिसको छुड़ाने के लिए श्रीराम द्वारा भेजी गई सेना लगातार पराजित होते चली गई लक्ष्मण को भी पराजय का सामना करना पड़ा अंत में लव कुश का सामना अपने पिता श्री राम से हुआ। लेकिन इसके पूर्व युद्ध में जीत के लिए चकलवंशी में श्री राम ने यज्ञ किया और यहां पर भुमेश्वर महादेव की स्थापना की।
महर्षि बाल्मीकि ने भी किया यज्ञ
अंतर्यामी महर्षि बाल्मीकि ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम द्वारा यज्ञ की जानकारी होने पर स्वयं भी यज्ञ किया और परियर क्षेत्र में स्थित टीले पर बल खंडेश्वर महादेव की स्थापना की। जिससे कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को यज्ञ के बाद मिले बल को खंडित किया जा सके।
Published on:
30 Aug 2021 06:35 pm
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