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वृष लग्न में शुक्र की दशम भाव में स्थित जातक कुल दीपक योग की करता है सृष्टि

- केन्द्र में शुक्र शनि का योग जातक को बनाता है राजा या राजमंत्री, I.A.S. अधिकारी

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उन्नाव. शंकर दयाल त्रिवेदी ने वृष लग्न के लग्नेश अर्थात शुक्र ग्रह के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वृष लग्न में शुक्र लग्नेश तथा षष्टेश होने से दुःस्थान स्थान का स्वामी है। फलत: अशुभ फल प्रदाता भी है। परंतु लग्नेश कभी अशुभ फल नहीं देता है। इसके विषय में ज्योतिषाचार्य शंकर दयाल त्रिवेदी ने पूरी जानकारी दी। उन्होंने वृष लग्न में शुक्र के केन्द्रगत स्थिति की चर्चा की। उन्होंने कहा वृष लग्न में शुक्र की दशम भाव में स्थिति जातक को कुल दीपक योग की सृष्टि करता है।

कुलदीपक योग वाला जातक

कुलदीपक योग वाला जातक अपने कुटुम्ब, परिवार का नाम दीपक की तरह रोशन करने वाला, सबका चहेता व प्यारा होता है। ऐसा जातक इंसान को तोलने वाला व्यक्ति न्यायधीश, वकील, उच्च राजपुरूष या राजा तुल्य ऐश्वर्य को भोगने वाला होता है। शुक्र की दशा अंतरदशा मे उन्नति होती है। वृष लग्न में शनि भाग्येश तथा कर्मेश का स्वामी होकर योगकारक होता है। फलतः जातक शनि के स्वभाव का होगा।जातक शैतान, चालाक और होशियार होगा। केन्द्र में शुक्र शनि का योग जातक को राजा या राजमंत्री, I.A.S. अधिकारी बनाता है। इसी प्रकार शुक्र बुध का केन्द्र में योग हो तो जातक को उच्च शिक्षा दिलाता है। जातक के पास अनेक वाहन होते हैं।वृष लग्न में केन्द्र में शुक्र मंगल योग हो तो जातक को राजा तुल्य सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। शुक्र सूर्य योग केंद्र में जातक को वाचाल बना देता है। किन्तु जातक सुखी व भाग्यवान होता है। वृष लग्न की कुंडली में यदि राहु शुक्र की युति केन्द्र में हो तो जातक को राजनीति में अवश्य सफलता मिलती है।