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उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया हाईकोर्ट का फैसला, जेल में ही कटेगी सजा

Unnao News: उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई सजा निलंबन राहत को रद्द कर दिया है।
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उन्नाव

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Mohd Danish

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Updated: 15 May 2026, 1:00 PM IST

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उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को बड़ा झटका

Kuldeep Sengar Rape Case: उन्नाव रेप केस में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को हुई अहम सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था। देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कर दिया कि फिलहाल सेंगर जेल में ही रहेगा और उसकी सजा बरकरार रहेगी। कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि मुख्य अपील पर जल्द से जल्द सुनवाई कर दो महीने के भीतर फैसला करने की कोशिश की जाए।

हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नजर

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने पहले ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और अब यह देखना जरूरी है कि सजा निलंबन का आदेश सही था या नहीं। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले में कई कानूनी और संवेदनशील पहलू हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिए कि हाईकोर्ट के तकनीकी आधार पर दिए गए फैसले को लेकर शीर्ष अदालत पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।

पीड़िता की उम्र को लेकर कोर्ट में बहस

सेंगर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने अदालत में दलील दी कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी। उन्होंने कहा कि AIIMS मेडिकल बोर्ड सहित कई रिपोर्टें सेंगर के पक्ष में हैं और उन रिपोर्टों के आधार पर सजा निलंबन उचित था। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि सेंगर को IPC की धारा 376(1) के तहत उम्रकैद की सजा मिली है और मामला बेहद गंभीर है। अदालत ने कहा कि अभी बहस का मुद्दा केवल सजा निलंबन का है, लेकिन पूरे मामले में कई ऐसे तथ्य हैं जिनकी विस्तार से समीक्षा जरूरी होगी।

POCSO कानून और MLA की भूमिका पर उठा सवाल

सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल यह भी उठा कि क्या किसी विधायक को POCSO कानून के तहत पब्लिक सर्वेंट माना जा सकता है। जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का अत्यधिक तकनीकी निष्कर्ष स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि POCSO कानून बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। वहीं सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि विधायक एक प्रभावशाली पद पर होता है और उसका प्रभाव पीड़ित पक्ष पर पड़ सकता है। अदालत ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया।

मुख्य अपील पर जल्द सुनवाई के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि मुख्य अपील की सुनवाई में देरी न की जाए। अदालत ने कहा कि यदि अपील पर जल्द फैसला संभव न हो तो सजा निलंबन की अर्जी पर नया आदेश पारित किया जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के मेरिट पर कोई अंतिम राय नहीं दी है और हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से मामले की सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि आगे की सुनवाई निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के हो।

राजनीतिक और कानूनी हलकों में बढ़ी हलचल

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में एक बार फिर उन्नाव रेप केस चर्चा का केंद्र बन गया है। यह मामला पहले ही देशभर में सुर्खियां बटोर चुका है और अब शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप के बाद इसकी कानूनी दिशा और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोर्ट के फैसले ने साफ संकेत दिया है कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को बेहद सावधानी और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

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