
cbi
उन्नाव. बांगरमऊ विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के ऊपर लगे दुष्कर्म के मामले में सीबीआई ने आज विशेष अदालत में पेश किया। जहां उसे एक बार फिर रिमांड में दिये जाने की मांग की थी। विशेष अदालत में रिमाइंड दिए जाने की याचिका खारिज कर दी। जेल भेज दिया गया विधायक को उन्नाव जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। एक के बाद एक बांगरमऊ विधायक की कठिनाई कम होने का नाम नहीं ले रही है सीबीआई ने दुष्कर्म कांड के आरोपी विधायक की पोटेंसी टेस्ट (मर्दानगी परीक्षण) कराने जा रही है। जिससे कि अदालत में सुनवाई के समय किसी प्रकार की समय की बर्बादी ना हो। केजीएमयू लखनऊ के यूरोलॉजी विभाग में केंद्रीय जांच ब्यूरो टीम के सदस्य पोटेंसी टेस्ट कराने के लिए गई थी। जहां से उन्हें बैरंग वापस आना पड़ा, क्योंकि इस प्रकार की कोई जांच की व्यवस्था किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ में नहीं है। इधर केंद्रीय जांच ब्यूरो की विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और सहआरोपी शशि सिंह की रिमांड पर लेने की अपील खारिज होने के बाद अदालत ने जिला कारागार भेज दिया।
गौरतलब है विगत 22 अप्रैल को गैंगरेप के आरोपी विधायक के भाई व उनके पांच साथियों को कोर्ट में पेश किया गया था । सीबीआई ने उसकी रिमांड की अर्जी नहीं लगाई थी। जिसके कारण पास्को कोर्ट ने उन्हें भी जेल भेज चुकी है। वही आज विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के साथ शशि सिंह को भी को जिला कारागार भेज दिया गया। इसके पूर्व सीबीआई ने माखी गांव में एक बार फिर छानबीन किया और दुष्कर्म पीड़िता को कुलदीप सिंह सेंगर के पास ले जाने वाली महिला शशि सिंह की कार सीज कर लिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों से पूछताछ हुई थी।
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत के बाद मचा था हंगामा
देश-विदेश में चर्चा में आया उन्नाव का दुष्कर्म कांड में आज भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की रिमांड खत्म होने के बाद विशेष अदालत में जेल भेजने का निर्देश दिया। जहां से उन्हें उन्नाव जिला कारागार में बंद कर दिया गया। इसके पूर्व उन्होंने सीबीआई द्वारा रिमांड पर देने की अर्जी को खारिज कर दिया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम एक बार फिर कुलदीप सिंह सेंगर को रिमांड पर लेने के प्रयास में थी। लेकिन उसकी मंशा पूरी नहीं हुई। जब विशेष अदालत में कुलदीप सिंह सेंगर को रिमांड पर लेने की अपील खारिज कर दी। इसके पूर्व कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर उसके साथियों को उसको अदालत पहले ही जेल भेजने का निर्देश दिया था। जिसे सीबीआई ने रिमांड पर लेने का कोई प्रयास भी नहीं किया था।
जिला कारागार में निरुद्ध पिता की जिला अस्पताल में हुई थी मौत
गौरतलब है विगत 3 अप्रैल को दुष्कर्म पीड़िता के पिता के साथ मां की गांव में विधायक के भाई और उनके साथियों ने मारपीट की थी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। दुष्कर्म पीड़िता के पिता को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके पहले माखी थाना में दुष्कर्म पीड़िता के पिता के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया गया।
वही जिला अस्पताल पहुंची माखी थाना की पुलिस ने दुष्कर्म पीड़िता के पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जहां विगत 8 अप्रैल को उसकी हालत गंभीर हो जाती है। जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। 9 अप्रैल को उपचार के दौरान जिला अस्पताल में दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत हो जाती है। दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत के बाद देश-विदेश में भाजपा विधायक और उसके भाई के खिलाफ जमकर आंदोलन हुआ और मीडिया ने भी मामले को तवज्जो दिया। प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विधायक के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया गया और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को दे दी गई। केंद्रीय जांच ब्यूरो को जांच मिलने के बाद जांच में आई गति के बाद भाजपा विधायक की मुश्किलें बढ़ गई ली। सीबीआई की रिमांड खत्म होने के बाद विधायक को जेल भेज दिया गया।
Published on:
27 Apr 2018 05:12 pm
बड़ी खबरें
View Allउन्नाव
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
