
उन्नाव. जिला अस्पताल और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सभी जगह अव्यवस्थाओं का आलम है। शासन और प्रशासन की मंशा के विपरीत डॉक्टर मरीजों से मनमाने तरीके से बर्ताव करते हैं। कैमरे में कैद वीडियो आपको विचलित कर देते हैं कि क्या धरती के देवता कहे जाने वाले डॉक्टर इस प्रकार का आचरण करते हैं। जिला अधिकारी की पत्नी द्वारा जिला अस्पताल को अच्छा बनाने के लिए की जा रही कवायद पर भी पूरी तरीके से जिला अस्पताल के महिला व पुरूष विभाग के अधीक्षक पानी फेर रहे हैं। इस विषय में कई बार जिलाधिकारी की डॉक्टर पत्नी ने दिशा निर्देश भी दिए, लेकिन एक दो दिन के बाद वही पुराना ढर्रा फिर सामने आ जाता है।
मुख्यालय के अस्पताल में डॉक्टर सोते रहे, मरीज तड़पते रहे-
इससे जुड़ा एक विचलित कर देने वाला वीडियो कैमरे में उस समय कैद हुआ जब एक गर्भवती महिला ने जिला अस्पताल के गलियारे में शिशु को जन्म दिया। जिस अस्पताल में मरीजों को बेड तक ना मिले उस अस्पताल से किसी प्रकार की अपेक्षा करना व्यर्थ है। यहां किसी न किसी रूप में मरीजों को लूटने का काम किया जा रहा है।
लापरवाही चरम पर
उमाशंकर दीक्षित संयुक्त चिकित्सालय में चिकित्सा अधीक्षक व डॉक्टरों की एक और बड़ी लापरवाही उस समय सामने आई जब प्रसूति महिला ने अस्पताल के गेट के पास शिशु को जन्म दिया। तड़पती कराहती महिला की आवाज जिला अस्पताल के अंदर सो रहे डॉक्टरों के कानों तक नहीं पहुंची और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। वैसे तो जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, परंतु जिला अस्पताल के अंदर डॉक्टर और नर्सों का यह रवैया किसी भी प्रकार से क्षम्य नहीं है, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं जिला अस्पताल में रोजमर्रा होती हैं।
सांसद साक्षी महाराज कहते हैं कानपुर-लखनऊ के बीच जनपद पिस-रहा है
वैसे देखा जाए तो जनपद का स्वास्थ्य विभाग लापरवाही की पराकाष्ठा पर है। सांसद साक्षी महाराज यूं ही नहीं कहते हैं कि उन्नाव कानपुर के बीच जनपद पिस-रहा है। अभी बांगरमऊ स्थित सरकारी अस्पतालों में सुविधा ना मिलने के कारण झोलाछाप डॉक्टरों की कारगुजारी सबके सामने है। जहां लगभग 3 दर्जन से ज्यादा मरीज HIV पॉजिटिव की बीमारी लिए घूम रहे हैं। इन HIV पॉजिटिव मरीजों को झोलाछाप डॉक्टर ने एक ही सिरिंज से इंजेक्शन दे दिया था। जिसके बाद यहां पर एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ। स्वास्थ्य कर्मियों की निगाहें शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाओं को मुफ्त देने की जगह उनकी निगाहें मरीज और तीमारदारों की जेब पर रहती है। शासन की मंशा जिला अधिकारी का प्रयास और जिलाधिकारी की ही डॉक्टर पत्नी द्वारा एड़ी चोटी का जोर लगाने के बाद भी जिला अस्पताल की स्थिति में सुधार नहीं आ पाया है।