
संगमनगरी के फिजाओं से गायब हुआ इलाहाबादी अमरूद की खुशबू, बाजार से गायब हुए सुर्खा- सफेदा
प्रयागराज: देश-दुनिया में अपने मिठास के लिए मशहूर इलाहाबादी अमरूर की खुशबू संगमनगरी की फिजाओं से गायब हो गई है। पिछले दो सालों से हो रहे कीटों के हमले से किसान बेहाल है। इलाहाबादी अमरूरद को बचाने के लिए सरकारी अमला काम तो कर रहा है लेकिन विफलता देखने को मिल रही है। इलाहाबादी अमरूर के नाम से जाने जाना वाला प्रयागराज के अमरूद अब शहरवासियों को लुभा नहीं पा रहे हैं। लोगों के मुंह में मिठास घोलने वाले इलाहाबाद के सफेदा अमरूद में इस बार भी बीमारियों ने हमला बोल दिया है जिसकी वजह से अमरूद की पैदावार मात्र 20 से 25 प्रतिशत की पैदावार हुई है।
इलाहाबादी अमरूद के नाम से है फेमस
जिस तरह से प्रयागराज को संगमनगरी से जाना जाता है उसी तरह इलाहाबादी अमरूद भी अलग छाप लोगों के दिमाग पर छोड़ा है। पिछले दो सालों से अमरूद के बाग में कीटनाशकों के हमले बोलने से 70 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है। जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राय भास्कर का कहना है कि इलाहाबादी अमरूद को बचाने के लिए इलाहाबादी अमरूद की प्रजाति के नए बाग लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पुराने बागों को फिर नए तरीके से उगाया जाएगा। ऐसा करने से फिर से इलाहाबादी अमरूद बाजार में देखने को मिलेगा।
छत्तीसगढ़ी अमरूद की हो रही है बिक्री
इलाहाबादी अमरूद के नाम से जाने जाना वाले शहर में छत्तीसगढ़ से लाये गए अमरूद की बिक्री की जा रही है। प्रयागराज के सिविल लाइन स्थित अमरूद बाजार में छत्तीसगढ़ से लाये गए अमरूद की भरमार देखी जा रही है। बाजार में इलाहाबादी अमरूद है लेकिन उसका रंग लोगों को आकर्षित नहीं कर रहा है।
सुर्खा और सफेदा गायब
इलाहाबाद के फेमस अमरूद सुर्खा और सफेदा का फसल बर्बाद होने की वजह से इस बार लोगों को अमरूद की मिठास नहीं मिलेगी। अमरूद बाग लगाने वाले किसानों का कहना है कि 2020 और 2021 में लगातार फसल बर्बाद हो गए हैं। अमरुद की खेती करने में जितनी लागत लगती है उसको भी निकलना मुश्किल पड़ गया है। अमरूद के बाद में कीटों के हमले से फल नहीं लग रहे हैं। अमरूद किसान आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर है।
फसल बचाने की कोशिश नहीं हुई सफल
2020 में अमरूद की फसल बर्बाद होने से इस वर्ष जिला उद्यान विभाग ने फसल को बचाने के लिए बागों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी किया था और इसके साथ ही किसानों को बचाव के तरीके भी बताया था। फसल बचाने की कवायद इस वर्ष भी सफल नहीं हो सकी है।
Published on:
24 Nov 2021 06:50 pm
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