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मैं IAS हूं, नौकरी लगवा दूंगी, और फिर शुरू होता था करोड़ों की ठगी का खेल, बरेली की तीन बहनों पर एक दिन में 9 FIR

खुद को आईएएस अफसर बताकर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाने वाली बरेली की तीन बहनों का ठगी साम्राज्य अब तेजी से ढहता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी में जेल जा चुकी विप्रा, दीक्षा और शिखा के खिलाफ पीड़ित लगातार सामने आ रहे हैं।

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बरेली। खुद को आईएएस अफसर बताकर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाने वाली बरेली की तीन बहनों का ठगी साम्राज्य अब तेजी से ढहता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी में जेल जा चुकी विप्रा, दीक्षा और शिखा के खिलाफ पीड़ित लगातार सामने आ रहे हैं। बुधवार को थाना बारादरी पुलिस ने एक ही दिन में 9 नई एफआईआर दर्ज कर पूरे शहर में सनसनी फैला दी। पुलिस अब इस पूरे रैकेट पर गैंगस्टर लगाने की तैयारी में जुट गई है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी का पूरा खेल बेहद शातिर तरीके से चलाया जाता था। भोजीपुरा के सैदपुर सरौरा निवासी सुरेंद्र पाल ने बताया कि उनकी मुलाकात शिखा पाठक से विश्वविद्यालय में हुई थी। शिखा ने खुद को प्रभावशाली परिवार का बताते हुए कहा कि उसकी बहन डॉ. विप्रा आईएएस अधिकारी है और वह लेखपाल से लेकर बीडीओ तक की नौकरी लगवा सकती है।

यहीं से बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर जाल में फंसाया जाता था। सुरेंद्र से 15 लाख रुपये की मांग की गई। उसने 13.50 लाख रुपये दे भी दिए। कुछ दिन बाद उसके पास लेखपाल का नियुक्ति पत्र पहुंचा, लेकिन जब जॉइनिंग करने गया तो पता चला कि पूरा दस्तावेज फर्जी था।

फर्जी जॉइनिंग लेटर भेजकर ऐंठे करोड़ों

जांच में सामने आया है कि गिरोह बेरोजगार युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर भरोसा जीतता था। कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें सरकारी विभागों के नाम से नकली जॉइनिंग लेटर दिए गए। जब तक ठगी का एहसास होता, लाखों रुपये बहनों के खातों और हाथों में पहुंच चुके होते थे।

रुपये मांगने गए तो मिली जेल भेजने की धमकी

पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने अपने रुपये वापस मांगने की कोशिश की तो बहनें उल्टा उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी देने लगीं। इसी डर की वजह से कई लोग लंबे समय तक सामने नहीं आए। अब लगातार शिकायतें बढ़ने के बाद पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है।

एक-एक कर खुल रही ठगी की परतें

पुलिस के मुताबिक देवरनिया, शीशगढ़, बदायूं रोड, नेकपुर, एजाजनगर और बीसलपुर समेत कई इलाकों के लोग इस गैंग का शिकार बने हैं। किसी से डेढ़ लाख, किसी से पांच लाख तो किसी से 13 लाख रुपये तक वसूले गए। सभी को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था।

पिता भी बना आरोपी, गैंगस्टर की तैयारी

इस बार दर्ज हुई एफआईआर में बहनों के पिता वीरेंद्र शर्मा को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का मानना है कि पूरा परिवार लंबे समय से संगठित तरीके से ठगी का नेटवर्क चला रहा था। इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह ने बताया कि लगातार नई शिकायतें मिल रही हैं और हर पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।