
लखनऊ. रक्षा के क्षेत्र भारत की बढ़ती आत्मनिर्भता का एक छोटा से नमूना है संयुक्त उद्यम उत्पादन कारबाइन (ज्वाइंट वेंचर प्रोडक्शन कारबाइन)। इस आधुनिक हथियार की डिजाइन को डीआरडीओ (DRDO) के आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान ने तैयार की है। जिसका निर्माण कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री (लघु शस्त्र निर्माणी) में किया जा रहा है। जेवीपीसी एक ऐसी कारबाइनहै जो हर मिनट में 800 गोलियां दुश्मनों पर बरसाएंगी। जेवीपीसी (JVPC) की पहली खेप में 105 कारबाइन कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री से सीतापुर स्थित यूपी पुलिस के आयुध भंडार भेजी जा चुकी है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को करारा जवाब देने के लिए जेवीपीसी बहुत ही कारगर हथियार साबित होगा।
पैरामिलिट्री फोर्सेस ने भी दिखाई जेवीपीसी (JVPC) में रुचि
बता दें कि जेवीपीसी (JVPC) को लेकर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के साथ ही पैरामिलिट्री फोर्सेस ने भी इसमें रुचि दिखायी थी। कानपुर की लघु शस्त्र निर्माणी ने करीब 4500 जेवीपीसी की खेप कई चरणों में पूरी कर दी है। जबकि अभी भी करीब पांच हजार जेवीपीसी का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। जेवीपीसी की खासियत को देखकर माना जा रहा है कि जल्द ही सेना के हथियारों में इसको शामिल किया जा सकता है।
कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री हो रहा है निर्माण
जानकारी के अनुसार कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री की क्षमता हर साल दस हजार जेवीपीसी बनाने की है। जिसे आवश्यकता के अनुसार और भी बढ़ाया जा सकता है।
मार्च 2022 तक 5 हजार JVPC बनाने का है टॉरगेट
दिल्ली पुलिस, जम्मू पुलिस के साथ संसद, दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा में लगी सीआइएसएफ से करीब दस हजार जेवीपीसी का आर्डर मिला था। इसमें पांच हजार तैयार कर ली गई हैं। माना जा रहा है कि मार्च 2022 तक नए आर्डर मिल सकते हैं। जिसके चलते अगले दो माह में पूर्व में मिले आर्डर तेजी से पूरा किया जा रहा है।
ज्वाइंट वेंचर प्रोडक्शन कारबाइन की विशेषताएं
लघु शस्त्र निर्माणी (SAF) और एआरडीई (ARDE) पुणे के संयुक्त प्रयास से ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कारबाइन को विकसित किया गया है। जेवीपीसी देश में विकसित कारबाइन है। पहले जो विदेश से कारबाइन खरीदी जाती थी, वे काफी महंगी पड़ती थीं। जेवीपीसी काफी हल्की कारबाइन है और बिना मैगजीन के इसका वजन सिर्फ तीन किलोग्राम है।
स्टील को भेदने में भी है सक्षम
यह कारबाइन बुलेट प्रूफ लक्ष्य और स्टील को भी भेदने में सक्षम है। इसे 200 मीटर दूर खड़े दुश्मन पर भी अचूक निशाना साधा जा सकता है। इसके अलावा जेवीपीसी का फायरिंग मोड मैनुअल व ऑटोमैटिक है। इसमें एक बार में 30 कारतूसों की मैगजीन लोड होती हैं।
एक मिनट में बरसेगी 800 गोलियां
वहीं, स्प्रिंग मैकेनिज्म सिस्टम के चलते कारतूसों की बेल्ट से एक मिनट में 800 गोलियां फायर होती हैं। जेवीपीसी एक बार में सबसे अधिक फायर करने वाली कारबाइन है। इसकी सबसे खास बात यह है कि गैस ऑपरेटेड होने से फायरिंग के बाद बैरल काला नहीं पड़ता है और नाइट विजन कैमरे से लैस होने के कारण रात में भी सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
सुरक्षाबलों की पहली पसंद बनी जेवीपीसी
ज्वाइंट वेंचर प्रोडक्शन कारबाइन केंद्रीय सुरक्षा बलों की पहली पसंद बन चुकी है। सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और बीएसएफ अब अपने जवानों को नई जेवीपीसी से लैस कर रहा है। इसके अलावा नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ पुलिस को भी यही कारबाइन दी जा रही है। वहीं उत्तर प्रदेश में आतंकियों के बढ़ते खतरे के को देखते हुए प्रदेश की पुलिस की आरमरी में जेवीपीसी को जल्द ही शामिल किया जाएगा।
Updated on:
07 Jan 2022 05:11 pm
Published on:
07 Jan 2022 05:05 pm
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