
सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया
समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने आज सोमवार को मेदांता अस्पताल में आखिरी सांस ली । मुलायम सिंह यादव का निधन 82 साल की उम्र में निधन हो गया । मुलायम सिंह यादव बीतें कई दिनों से गुरूग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे। जहां पर उनकी हालत काफी नाजुक थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। मुलायम सिंह यादव को यूरिन संक्रमण, ब्लड प्रेशर की समस्या और सांस लेने में तकलीफ थी। मेदांता अस्पताल के एक विशेषज्ञ डॉ0 की टीम के देखरेख में उनका इलाज चल रहा था।
पीएम मोदी, प्रियंका गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल तक नेताओं ने दु;ख व्यक्त किया।
पीएम मोदी ने तस्वीरें साझा करके शोक जताया
यूपी के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव के मृत्यु की खबर सुनकर हर कोई दु:खी है। पीएम मोदी ने ट्वीट करके शोक जताया साथ ही उनके साथ की कुछ तस्वीरें साझा की। पीएम मोदी ने लिखा कि मुलायम एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें एक विनम्र और जमीन से जुड़े नेता के रूप में व्यापक रूप से सराहा गया, जो लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील थे। उन्होंने लगन से लोगों की सेवा की और लोकनायक जेपी और डॉ. लोहिया के आदर्शों को लोकप्रिय बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
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कुश्ती में पहलवान को चित किया
मुलायम सिंह के कई रोचक किस्से हैं उन्हें में से एक किस्सा है जब उन्हें पहली बार विधानसभा चुनाव का टिकट मिला और चुनाव लड़े, जीत हासिल की । मुलायम सिंह यादव जब युवा थे तब वह पहलवानी किया करते थे । मुलायम सिंह यादव मास्टरी छोड़ चुके थे, और अब वह सक्रिय राजनीति में आना चाहते थे । हालांकि पहले वे पहलवानी के साथ-साथ राजनीतिक अखाड़े में भी सक्रिय रहे लेकिन एक घटना ने उनका जीवन बदल डाला।
बात 60 वें दशक की है । डॉ. राम मनोहर लोहिया ने प्रभावित होकर कई युवा सक्रिय राजनीति में आने लगे थे , उन्हें में से एक मुलायम सिंह यादव थे । मुलायम सिंह यादव सक्रिय राजनीति में आने का पूरा मन बना लिया था। वह डॉ. राम मनोहर लोहिया की जनसभाओं में उनकी भाषण सुनने के लिए जाने लगे थे।
मुलायम सिंह को पूर्व नत्थू सिंह ने दिलाई राजनीति में एंट्री
एक बार की बात है जब जसवंतनगर के तत्कालीनी विधायक और संयुक्त सोशललिस्ट पार्टी के नेता नत्थू सिंह एक पहलवानी प्रतियोगिता में बतौर अतिथि आमंत्रित थे। उसमें मुलायम ने अपने से काफी बड़े पहलवान को चित कर दिया। तालियों की गूंज से पूरा मैदान गूंज रहा था। उस वक्त नत्थू सिंह की नजर 28 साल के मुलायम पर पड़ी और इंप्रेस हो गए। नत्थू सिंह की अप्रोच पर मुलायम उनके शिष्य बन गए। बस फिर उस दिन से मुलायम का राजनीतिक जीवन में नई एंट्री हुई।
नत्थू सिंह का शिष्य बनने के बाद मुलायम सिंह यादव पहलवानी के साथ राजनीति के सभी दांव पेंच को सीख लिया। 1967 यूपी में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका था सभी राजनीतिक पार्टियां विचार कर रही थी कि कहां से किसे टिकट दिया । नत्थू सिंह ने जसवंतनगर से विधायक थे और असमंजस में पड़े थे कि कहां से चुनाव लड़ा जाए? नत्थू सिंह ने डॉ0 राम मनोहर लोहिया से मुलायम सिंह को लेकर सिफारिश की औक कहां कि मुलायम सिंह को जसवंतनगर से विधानसभा से टिकट दिया और हमें करहल से । मुलायम सिंह को जसवंतनगर से टिकट मिला और चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर जीत दर्ज की और पहली बार विधानसभा पहुंचे ।
Updated on:
10 Oct 2022 12:03 pm
Published on:
10 Oct 2022 12:02 pm
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