16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Lucknow Uttar Pradesh: वो पांच बातें जो लखनऊ को बनाती हैंं खास

लखनऊ (lucknow uttar pradesh) पूरी दुनिया में एक खास स्थान रखता हैं। आइए जानते हैंं वो पांच वजह जो लखनऊ (lakhnaw) को खास बनाती हैंं। इन बातों के जरिए आपको लखनऊ के बारे में नई कहानियां और किस्से जानने को मिलेंगे। इन किस्से कहानियों को हमने इंटरनेट और लखनऊ निवासियों से बात करते पता लगाई हैं।

5 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Adarsh Tiwari

Jan 19, 2023

बड़ा इमामबाड़ा, लखनऊ Lacknaw

बड़ा इमामबाड़ा, लखनऊ Lacknaw

1: अनोखी हैं लखनऊ (lucknow uttar pradesh) के नामकरण की कहानी

लखनऊ (lakhnaw) का नाम लखनऊ ऐसे ही नही हैं। इसके पीछे कुल तीन पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इन तीनों कथाओं में अलग-अलग बातें बताई गई हैं। लेकिन इन कथाओं से ये तो पक्का हो जाता हैं की लखनऊ (lucknow uttar pradesh) का नाम हिंदू देवी देवताओं के नाम से निकल के आया हैं। तो आइए एक-एक करके इन तीनों पौराणिक कथाओं को जानते हैं।

पहली कहानी के अनुसार लखनऊ (lucknow uttar pradesh) का नाम भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी के नाम पर रखा गया हैं। ऐसा कहा जाता है कि आज जहा लखनऊ हैं वहा पर लक्ष्मण जी का एक महल हुआ करता था। उस महल के आसपास जो भी बस्ती थी उसे लक्ष्मणपुरी के नाम से जाना जाता था। लेकिन 11वीं शताब्दी में लक्ष्मणपुरी को लोगों ने लखनपुर कहना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे समय के साथ इसे लखनऊ के नाम से जाना जाने लगा।

दूसरी कहानी पहली कहानी से जुड़ी हुई हैं। बस कुछ विद्वान मानते हैंं कि जहां लक्ष्मण जी रहते हैंं उस स्थान को लक्ष्मणपुरी नहीं बल्कि लक्ष्मणवती कहा जाता था। समय के साथ इसे लखनवती फिर लखनौती और अंत में लखनऊ कहा जाने लगा हैं।

लखनऊ (about lucknow) के बारे में तीसरी कहानी ऊपर की दोनो कहानियों से बिलकुल अलग हैं। इस कहानी के अनुसार लखनऊ नाम सीधा-सीधा देवी लक्ष्मी से जुड़ा हुआ हैं। देवी लक्ष्मी हिंदुओं में धन की देवी हैं। और इन्ही के नाम पर लखनऊ को पहले लक्समणती फिर लक्समनौत फिर लखसनौत उसके बाद लखसनऊ और अंत में लखनऊ पड़ा हैं।

IMAGE CREDIT: Internet

2: नवाबों से लखनऊ (lucknow uttar pradesh) को मिली खास पहचान

आज के दिन लखनऊ (lakhnaw) को नवाबों का शहर कहा जाता हैं। लेकिन इसका नाम नवाबों का शहर किसी खास वजह से रखा गया हैं। दरअसल, इसके पीछे एक रोचक कहानी हैं। 1732 का वह साल था जब नवाब लखनऊ आए थे। नवाबों ने लखनऊ पर राज करना शुरू किया। लेकिन 1755 तक मुगलों का खतरा बना हैं। जब 1755 में मुगल साम्राज्य खतम हो गया तो नवाबों ने लखनऊ को सजाना संवारना शुरू किया।

कहते हैं की लखनऊ (lucknow uttar pradesh) के नवाबों ने लखनऊ को मीठी बोली दी, विशाल महल दिए, स्वादिष्ट पकवान दिए और इन सब को मिलाकर राजसी ठाठ बाट दिया। आज लखनऊ के लोग उसी अंदाज में जीते हैं जैसे नवाब जिया करते थे। उनके रहने, खाने, बोलने का ढंग बिलकुल अलग और नवाबी हैं। इसी कारण पूरी दुनिया में लखनऊ को नवाबों का शहर कहा जाता हैं।

IMAGE CREDIT: Internet

3: कबाब जैसे पकवान से हैं लखनऊ (lakhnaw) की शान

हर शहर अपने खाने-पीने के लिए मशहूर होता हैं। लेकिन लखनऊ (lucknow uttar pradesh) इस मामले में बहुत आगे हैं। कहते हैंहैं कि लखनऊ के लोग सकल से मांस खाने वालों को पहचान जाते हैं। इसके पीछे एक कहानी बहुत प्रचलित हैं।

एक बार कोई पत्रकार लखनऊ (lakhnaw) गया। तो उसने किसी दुकान वाले से कहा की बिरियानी लाओ। फिर उस दुकान वाले ने झट से कहा की आप का चेहरा देख के तो नही लगता की आप चिकन खाते होंगे। फिर बाद में पता चला की वह पत्रकार सच में चिकन नही खाता था। उस पत्रकार ने इस बात की खबर बनाई। उसी समय से सब को विश्वास हो गया की लखनऊ के लोग सकल देख के मांस खाने वालों को पहचान जाते हैं।


लखनऊ (lucknow uttar pradesh) की चिकनकारी के बारे में एक किस्सा इतिहास से जुड़ा हुआ हैं। कहते हैं की आज के समय में लखनऊ में जो चिकनकारी होती हैं, उसकी शुरुआत 17वी शताब्दी में ही हो गई थी। इसको जहागीर की बेगम नूरजहां तुर्क ने शुरू कराया था। वो चिकनकारी से बहुत प्रभावित थी और उनके कहने पर ही जहांगीर ने चिकनकारी की बहुत सी कार्यशालाएं खुलवाई थी। इस तरह लखनऊ में चिकनकारी की विद्या विकसित हुई। आज के समय लखनऊ के चिकनकारी को GI टैग मिल गया हैं। यह सिर्फ लखनऊ नही बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात हैं।


आज के समय लखनऊ (lakhnaw) में मुर्रे, बखिया, जाली, तेपची, फंदा, जंजीरा, आदि ऐसे 36 प्रकार के चिकन बनते हैं। इसके साथ ही गलावटी कबाब, नहारी-कुल्चा और शाही कोरमा जैसे व्यंजन भी लखनऊ के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।

IMAGE CREDIT: Internet

4: महलों और इमारतों से हैं लखनऊ (lakhnaw) की खूबसूरती

नवाबी रहन सहन और स्वादिष्ट पकवान के साथ साथ लखनऊ (lucknow uttar pradesh) की खुबसूरती भी इसे खास बनाती हैं। लखनऊ की खुबसूरती में पुराने महलों और नई इमारतों का सामान योगदान हैं। नई इमारतों में जनेश्वर मिश्रा पार्क और इकाना स्टेडियम दो सबसे खास हैं। जबकि बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा पुराने महलों के रूप में यह की शान हैं।


जनेश्वर मिश्रा (Janeshwar Mishra) पार्क

जनेश्वर मिश्रा समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के एक बड़े नेता थे। इनको छोटे लोहिया भी कहा जाता हैं। इनके नाम पर ही लखनऊ में जनेश्वर मिश्रा पार्क (Janeshwar Mishra Park) बना हैं। अपनी खूबसूरती के चलते यह पार्क शहर में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं। अन्य शहरों से भी लोग इसे खास तौर पर देखने आते हैं। इन पार्क के भीतर 40 एकड़ में बना झील मुख्य आकर्षण हैं।

IMAGE CREDIT: Internet

इकाना स्टेडियम (Ekana Stadium)

इकना स्टेडियम लखनऊ को नई पहचान दे रहा हैं। इस स्टेडियम में अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैक हो रहे हैं। इस तरह लखनऊ इन नई इमारतों के चलते और भी खूबसूरत व आकर्षक हो गया हैं।

IMAGE CREDIT: Internet

बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा

लखनऊ (lucknow uttar pradesh) का बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा बेहद खूबसूरत हैं। इसको लखनऊ के नवाबों ने बनवाया था। बड़ा इमामबाड़ा में मौजूद भुलभुलैया के बारे में एक कहानी बहुत प्रसिद्ध हैं। कहते हैं की इसको नवाबों ने आक्रमण के समय छुपने के लिए या किसी को अकाल मौत देने के लिए बनवाया था। आज के समय लोग यहां जाकर घूमना और भुलभुलैया को देखना खूब पसंद करते हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना हैं की इस भुलभुलैया में अब तक हजारों को हमेशा के लिए को चुके हैं।

IMAGE CREDIT: Internet

5: लखनऊ (lucknow uttar pradesh) से दशहरी आम का जुड़ाव

दशहरी आमों की मांग भारत के कोने कोने में हैं। जबकि इसे लंदन और अमरीका तक के लोग खाना पसंद करते हैं। तो इस दशहरी आम की शुरुआत लखनऊ (lakhnaw) से ही हुई थी। दरअसल, लखनऊ से पंद्रह किलोमीटर दूर एक गांव हैं जिसे दशहरी गांव कहते हैं। इसी गांव में आज से 200 साल पहले दशहरी आम का पेड़ लगाया गया था। यह पेड़ आज भी लखनऊ के उस गांव में मौजूद हैं। इसको सरकार ने संरक्षित कर दिया हैं। इसे लोग दूर दूर से देखने आते हैं और इसको दुनिया के पहले दशहरी पेड़ के रूप में जाना जाता हैं। तो इस तरह आज दुनिया भर में मशहूर दशहरी आम की शुरुआत लखनऊ से हुई हैं। आज भी देश के अलग अलग इलाकों में लखनऊ के दशहरी आम की भरी मांग होती हैं। लोग लखनऊ का दशहरी आम खाने के लिए दोगुना पैसा देने को तैयार रहते हैं। इस तरह दशहरी आम भी लखनऊ को पूरी दुनिया में खास बनाता हैं।

IMAGE CREDIT: Internet