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रूस-यूक्रेन विवाद में फंसे वाराणसी के 11 बच्चे, परिवार सदमे में, बच्चों की पुकार प्लीज जैसे भी हो जल्द बुला लें भारत

रूस-यूक्रेन विवाद ने वाराणसी के 11 परिवारों का जीवन ही बदल दिया है। इन परिवारों के बच्चे डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए चार-पांच साल पहले यूक्रेन गए थे। अब मौजूदा हालात में इन परिवारों के सदस्य सदमे में है। घर और गांव-मोहल्ले वाले बस ईश्वर से सलामती की दुआ कर रहे हैं। हालांकि पिंडरा के दो परिवारों के लिए अच्छी खबर ये है कि उनके बच्चे यूक्रेन से रोमानिया के लिए निकल चुके हैं। अब उम्मीद है कि उनकी जल्द ही घर वापसी होगी।

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रूस-यूक्रेन विवाद में फंसे वाराणसी के दो बच्चे ललित व देवल

रूस-यूक्रेन विवाद में फंसे वाराणसी के दो बच्चे ललित व देवल

वाराणसी. जिले के 11 बच्चे रूस-यूक्रेन विवाद के चलते यूक्रेन में फंसे हैं। इनके परिवारों का बुरा हाल है। घर का हर सदस्य गहरे सदमे में है। आस-पास के लोग भी इन बच्चों को लेकर परेशान हैं। ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। जो भी आसपास वाला घर आता है उससे गुहार लगाते हैं जैसे हो बच्चों को सकुशल लौटा लाएं। कुछ लोग अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आस लगाए बैठे हैं कि वो ही कुछ करेंगे। प्रधानमंत्री ही बच्चों को वापस लाएंगे।

बनारस के 11 बच्चे यूक्रेन में फंसे है। हालांकि जिला प्रशासन 5 की ही पुष्टि कर रहा है। जिनके घरों के बच्चे यूक्रेन में फंसे है उनमें पिंडरा विधानसभा क्षेत्र के तीन बच्चे हैं तो लंका क्षेत्र के उत्तम चतुर्वेदी और गुरुधाम कालोनी निवासी चंद्रा सोनी भी हैं। ये सभी बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गए थे।

पिंडरा विधानसभा क्षेत्र के दो परिवारों का इन दिनों रूस-यूक्रेन विवाद के चलते बुरा हाल है। दोनों परिवार बस दिन-रात टीवी पर टकटकी लगाए रहते हैं। ये बच्चे डॉक्टरी की पढाई करने यूक्रेन गए थे। दो में से एक पांचवे साल तो दूसरा चौथे साल में है। ऐसे में इनके परिवार के लोग ईश्वर से रहम की भीख मांग रहे। दुआ कर रहे कि किसी तरह से बच्चे जल्द से जल्द घर लौट आएं। दो परिवार ही नहीं बल्कि आसपास के लोग, आसपास के गांव वाले भी रोज इनके दरवाजे पर पहुंचते हैं और बच्चो की सलामती की जानकारी हासिल करते हैं। वो भी ऊपर वाले से बच्चों के जल्द से जल्द घर वापसी की दुआ करते हैं। हालांकि देर रात एक अच्छी सूचना घर वालों को लगी कि यूक्रेन में फंसे सभी बच्चे बस से रोमानिया के लिए रवाना हो चुके हैं। उनके जल्द ही घर वापसी की उम्मीद जगी है।

ग्राम प्रधान चंदतारा का बेटे के लिए रो-रो कर बुरा हाल

फूलपुर क्षेत्र के धरसौना गांव की ग्राम प्रधान चंदतारा देवी का परिवार सदमे में है। बेटा ललिल कुमार लाल यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया था। अब रूस-यूक्रेन विवाद के बाद से चंदतारा देवी और उनका पूरा परिवार बेटे की सकुशल वापसी के लिए ईश्वर से मम्मतें मांग रहे है। ग्राम प्रधान के लाड़ले की सलामती के लिए धरसौना ही नहीं आसपास गांव के सैकड़ो लोग रोज ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। रोजाना वो लोग चंदतारा के घर के आगे जमा होते हैं और बेटे ललित का कुशल जानते हैं।

2017 में यूक्रेन गया था ललित
धरसौना गांव की ग्राम प्रधान चंदतारा देवी का दूसरे नंबर का बेटा ललित कुमार लाल 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गया था। वह वर्तमान में ओडेसा नेशनल मेडिकल कालेज में पांचवे वर्ष का छात्र है। पिता रामचंद्र राम राजस्व विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

जुलाई में घर आया, बहन के कहने पर रक्षा बंधन तक रुका था
बताते है कि ललित जुलाई माह में छुट्टी पर घर आया था। अगस्त में जाना था। बहनों के कहने पर रक्षा बंधन तक रुका फिर यूक्रेन रवाना हो गया। रामचंद्र बताते हैं कि रूस-यूक्रेन विवाद हम लोगों के लिए तो चकित करने वाला रहा। दो दिन पहले बेटे से बात हुई तो कहा कि मेडिकल कालेज के टीचर कह रहे है कि ऑफलाइन क्लास चलेगी। इस लिए बेटा रुक गया। हवाई टिकट के लिए पैसे का इंतजाम कर भेजा है। लेकिन एयरपोर्ट से हवाई सेवाएं ठप है, जिसके चलते अब परिवार के लोग परेशान है।

मां ही नहीं बहन का भी बुरा हाल
माता चंदतारा देवी, बहन नीलम कुमारी व बड़ी मां प्रभावती देवी सदमे में है। घर की महिलाओं का रो-रो कर बुरा हाल है। परिजन टीवी पर टकटकी लगाए रूस व यूक्रेन की लड़ाई को देख रहे है और बेटे के सलामती के लिए दुआएं कर रहे है। इंटरनेट मोबाइल के माध्यम से ललित से बात कर पल पल की जानकारी ले रहे है।

प्लीज भारत सरकार से व्यवस्था कराइए, घर आना चाहते है

पिंडरा बाजार स्थित बेलवां रोड़ पर निजी अस्पताल के मालिक डॉ रामेशचंद्र वर्मा के इकलौते पुत्र देवल ने वर्ष 2018 में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए ओडेसा यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। देवल अब चौथे वर्ष का छात्र है। बेटे देवल की सकुशल वापसी के लिए माता फूलकुमारी वर्मा का रो-रो कर बुरा हाल है। परिजन टीवी स्क्रीन पर रूस यूक्रेन युद्ध को देखकर सकते में हैं। यूक्रेन के शहरों पर बमबारी से रोगते खड़े हो जा रहे है। परिजन पल पल की जानकारी ले रहे हैं।

हूटर बजाती सरकारी गाड़ियों की तेज आवाज डराती है
यूक्रेन में फसें एमबीबीएस के छात्र देवल वर्मा के परिजनों के अनुसार देवल ने बताया कि ओडेसा शहर के एक फ़्लैट में 4 लोग एक साथ कैद है। रात में कर्फ्यू लगा हुआ है। सड़को पर सन्नटा पसरा हुआ है। सेफ्टी के लिए यूक्रेन सरकार की ओर से सायरन बजाती गाड़िया अलर्ट कर रही है। रूम के अंदर हम लोग पड़े है। भारतीय दूतावास के संपर्क में लगे है। दूतावास से ये सलाह दी गई है कि एक साथ ग्रुप में इकट्ठा रहे।

यूक्रेन में फंसे है 20 हजार से ज्यादा छात्र
यहां एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले भारतीय मूल के बीस हजार से ज्यादा छात्र है। पूर्वाचल व पड़ोसी राज्य बिहार के सैकड़ो लोग है। आपस मे बातचीत हो रही है। कही से निकलने का कोई मौका नही है। पानी और राशन एक सप्ताह के लिए लिया था। लेकिन अब यहां का माहौल बहुत खराब है।

सभी दहशत में जी रहे
साथी छात्र मनीष शुक्ला इलहाबाद, अभिनव गुप्ता, मनीष द्विवेदी निकिता अब एक साथ रहे है। वे सभी दहशत में जी रहे है। बार्डर के देश बहुत दूर है। पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया, हंगरी बहुत दूर है। बच्चे कहते हैं अंकल प्लीज कोई व्यवस्था भारत सरकार से कराइए। यहां लगातार बमबारी और धमाका हो रहा है। आवाज सुनाई दे रही है। दिल दहल गया है। यह कहते हुए देवल भावुक हो जाता है।

22 साथियों संग बंकर में है उत्तम
उधर लंका क्षेत्र के विवेकानंद कालोनी निवासी उत्तम सेंट्रल कीव की नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है। उत्तम के पिता बृजभूषणण दुबे का कहना है कि बेटा अपने 22 साथियों संग बंकर में है। वहां से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर धमाके हो रहे हैं जिन्हें सुन कर बच्चे घबरा जा रहे हैं। इतना ही नहीं उनके खाने-पीने का भी समुचित इंतजाम नहीं है। बताते हैं कि बेटा 25 फरवरी को ही लौटने वाला था लेकिन युद्ध आरंभ होने के कारण फंस गया, टिकट कैंसिल हो गया। अब उसकी वतन वापसी के लिए दूतावास और विदेश

मंत्रालय से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं।
वहीं गुरुधाम कालोनी निवासी सराफा व्यवसायी माधव सोनी की बेटी चंद्रा सोनी भी यूक्रेन में फंसी है। घरवालों ने बताया कि सोनी का भाई वेंकटेश सोनी जो बर्लिन (जर्मनी) में एमबीए कर रहा है वो बहन के लिए बर्लिन में रुका इंतजार कर रहा है कि जैसे ही मौका मिले वो बहन को पोलैंड के रास्ते भारत ला सके।