
वाराणसी में गंगा नदी में चलने वाली नावों को डीजल से CNG में बदला जा रहा है। गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए ये किया जा रहा है। इसके लिए प्रशासनिक अमला जोरशोर से काम में जुटा है।
657 नाव की सूची दी गई थी
नगर निगम ने 657 नावों की सूची मेसर्स मायकान इंडिया लिमिटेड को दी थी। सूची में से कंपनी ने 583 डीजल नावों का सीएनजी में बदल दिया है। नगर आयुक्त प्रणय सिंह ने बताया, “इस तरह के ठोस प्रयास में गंगा में प्रदूषण को कम करने में हमें मदद मिलेगी। इसके साथ ही वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान भी होगा।”
नए लाइसेंस भी बनाए जा रहे हैं
नगर आयुक्त ने बताया कि डीजल नाव को जल्द से जल्द सीएनजी में कन्वर्ट करने के साथ-साथ नावों के पुराने लाइसेंस का भी नवीनीकरण किया जा रहा है। नगर आयुक्त ने यह भी बताया कि गंगा नदी में जल का स्तर बढ़ने के कारण नमो घाट का काम अभी रुका हुआ था। नमो घाट का काम फिर से शुरू हो चुका है।
गंगा की सफाई में अब तक 13,000 रूपए का खर्च
2014 से लेकर अब तक केंद्र सरकार गंगा की सफाई पर 13,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। इसमें से राशि का सबसे ज्यादा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिला है। शुक्रवार को तीन साल बाद परिषद की बैठक हुई। नमामि गंगे कार्यक्रम तहत जिम्मेदार लोगों ने बैठक में एक रिपोर्ट सौंपी।
नमामि गंगे कार्यक्रम की रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 31 अक्टूबर, 2022 तक NMCG को कुल 13,709.72 करोड़ रुपए दिए हैं। जारी की गई राशि में से 4,205.41 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को जारी किए गए, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। गंगा की कुल 2,525 किलोमीटर लंबाई का लगभग 1,100 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में पड़ता है। केंद्र सरकार ने जून 2014 में यह कार्यक्रम शुरू किया था।
Updated on:
31 Dec 2022 02:25 pm
Published on:
31 Dec 2022 02:12 pm
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