महाराष्ट्र के ब्राह्मणों के लिए काशी अकबर के राज्यकाल से ही एक बड़ा तीर्थ बन गई थी। पेशवाई प्रारम्भ हुई तो बनारस के दिन बदलने लगे। इतिहास बताता है कि बाजीराव पेशवा ने महाराष्ट्र के कई ब्राहमणों को पूजा अर्चना के लिए काशी भेजा, कई ब्रह्मापुरियां बनवाई घाट बनवाए, सुप्रसिद्ध दशाश्वमेघ घाट का निर्माण भी बाजीराव पेशवा ने ही कराया है, इसके अलावा बनारस के तक़रीबन एक तिहाई घाटों के निर्माण में भी पेशवा बाजीराव की अहम् भूमिका रही, जिनमे मणिकर्णिका, राजा घाट, पंचगंगा घाट शामिल है। बनारस शहर के चतुर्दिक विकास के लिए बाजीराव ने अपने विश्वासपात्र सदाशिव नाईक को विशेष प्रभारी बनाकर बनारस भेजा था और उनसे समूचे काशी क्षेत्र का चतुर्दिक विकास करने को कहा था। यह वो वक्त था जब बनारस में रहने को आने वाले हर व्यक्ति को किराया देना पड़ता था।